जमीन के सर्किल रेट ने उड़ाए होश

Noida Updated Sat, 22 Dec 2012 05:30 AM IST
नोएडा। नोएडावासी किसी और चीज के लिए वर्ष 2012 को याद रखें या न रखें, जमीन की कीमतें आसमान पर पहुंचने को जरूर याद रखेंगे। एनसीआर में रिहायशी जमीन की सबसे ज्यादा सर्किल रेट केलिए जरूर याद रखेंगे। सुबह दस बजे से पांच बजे तक रजिस्ट्री कराने की सिस्टम भी इसी साल लागू हुआ। वर-वधू का फोटो लगा विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र देने की व्यवस्था भी इसी साल से शुरू की गई। प्रस्तुत है वर्ष 2012 में हुई कुछ प्रमुख घटनाओं का लेखा-जोखा।
साल की शुरुआत बार एसोसिएशन ऑफ नोएडा व पुलिस केबीच टकराव से हुई। विधानसभा चुनाव के चलते लागू अधिसूचना केचलते जनवरी में एक लाख से अधिक धनराशि लाने वालों की पुलिस ने विभागीय पसिर में आकर जांच शुरू की। कुछेक तो लॉकअप में भी पहुंचा दिया। इस पर बार एसोसिएशन व पुलिस के बीच टकराव होते-होते बचा। आवासीय समितियों केफ्लैटों की रजिस्ट्री की अंतिम तिथि भी 26 जनवरी तय थी। इसके बाद रजिस्ट्री कराने वालों को पेनॉल्टी सहित स्टांप शुल्क चुकाना पड़ा। यमुना प्राधिकरण के आवंटियों को बिना रजिस्ट्री संपत्ति के ट्रांसफर पर रोक लगा दी गई। इससे वहां के 20 हजार आवंटियों को दिक्कत हुई।
बीते साल के मुकाबले इस साल महिलाओं के नाम कम संपत्तियां भी दर्ज हुई। वित्तीय वर्ष 2011-12 में जिले में कुल 97653 संपत्तियां दर्ज हुईं। इसमें से महिलाओं के नाम 18567 संपत्ति की रजिस्ट्री हुई है, जबकि 2010-11 में कुल 86786 संपत्ति दर्ज हुई थी, जिसमें करीब करीब 25 हजार संपत्ति महिलाओं केनाम दर्ज हुई थी। बीते सात वर्षों में आईटी भूखंड लेने वाले आवंटियों की जांच होने और उनसे जुर्माना सहित स्टांप शुल्क वसूलने की घटना भी हलचल मचाया। शर्तों का उल्लंघन करने पर 70 से अधिक आईटी आवंटियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। यह जांच अब भी जारी है।
इस साल नोएडा में जमीन का सरकारी भाव तेजी से बढ़ा। पहले तो प्राधिकरण ने दो साल बाद आवंटन दरें रिवाइज कर जमीन के दाम बढ़ा दिए। नई दरों में 15 प्रतिशत तक वृद्धि की गई। उसकेबाद रजिस्ट्री विभाग ने अपना सर्किल रेट बढ़ा दिया है। इसकेअनुसार शहरी आवासीय भूखंडों की कीमतें करीब 30 से 32 फीसदी, ग्रामीण आवासीय और औद्योगिक भूखंडों की दरें 10 से 12 फीसदी, संस्थागत भूखंडों में 25 फीसदी, कृषि दरों में 15 से 20 फीसदी, ग्रुप हाउसिंग में 22 फीसदी, वाणिज्यिक संपत्तियों में 10 से 12 फीसदी और अपार्टमेंट में 30 से 40 फीसदी वृद्धि कर दी गई। इस कारण न सिर्फ प्राधिकरण से आवंटित संपत्तियों, बल्कि रीसेल में संपत्ति के बाजारी कीमतों में भी तेजी से उछाल आया। अगस्त माह से रजिस्ट्री विभाग की वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट रजिस्ट्रीऑफिस डॉट एनआईसी डॉट इन पर संपत्ति का ब्योरा देखने की सुविधा इस साल शुरू की गई। 18 से 21 दिसंबर तक चले हड़ताल ने भी संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वालों को खूब परेशान किया।
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ये प्रस्ताव रहे अधूरे
विभाग ने कुछ ऐसे प्रस्ताव भी बनाए जो अगर लागू कर दिए गए होते तो लोगों को काफी राहत मिल जाती। मल्टीपल अटॉर्नी पर बिकी संपत्तियों को रजिस्ट्री की छूट के लिए स्थानीय कार्यालय ने प्रस्ताव बनाकर भेजा, मगर कोई फायदा नहीं हुआ। आधा फीसदी स्टांप शुल्क देकर संपत्ति का एग्रीमेंट टू लीज कराने का प्रस्ताव भी अब तक ठंडे बस्ते में ही पड़ा हुआ है। प्रथम तल दफ्तर होने के कारण रजिस्ट्री विभाग में रैंप बनाना बेहद जरूरी है। रैंप केअभाव में विकलांग व असहाय व्यक्तियों को जान जोखिम में डालकर रजिस्ट्री करानी पड़ती है। प्रमुख सचिव की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया गया। इसकेबावजूद कोई लाभ नहीं हुआ। ऐसे कई अन्य मुद्दे भी हैं, जो अधूरे रह गए। विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर भी लंबे समय तक काफी चर्चाएं रहीं।

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