चंदौली के तत्कालीन विधायक ने भी की पत्थरों की आपूर्ति

Noida Updated Thu, 13 Dec 2012 05:30 AM IST
लखनऊ। लखनऊ और नोएडा में 2007-2011 के बीच अंबेडकर स्मारकों-पार्कों के लिए लगाए गए पत्थरों की आपूूर्ति करने वालों में चंदौली के तत्कालीन विधायक शारदा प्रसाद भी शामिल हैं। शारदा प्रसाद व उनके बेटे राकेश ने मिर्जापुर के एक खनन पट्टाधारक के साथ पार्टनरशिप बनाकर स्मारकों के लिए पत्थरों की आपूर्ति की और बाकायदा अपने नाम भुगतान लिया। इतना ही नहीं स्मारकों के लिए पत्थरों की खरीद और उनकी तराशी के लिए बाजार दर से तीन से चार गुना ज्यादा दर पर भुगतान भी किया गया। इसका खुलासा लोक आयुक्त की निगरानी में आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा मिर्जापुर व चुनाव के खनन पट्टाधारकों के दर्ज किए गए बयानों से हुआ है। ईओडब्ल्यू तत्कालीन विधायक शारदा प्रसाद से भी पूछताछ की तैयारी में है।
लोक आयुक्त द्वारा स्मारक निर्माण घोटाले में ईओडब्ल्यू के जरिये अब तक दर्ज बयानों और एकत्र किए गए साक्ष्यों के परीक्षण में पता चला है कि पत्थरों की आपूर्ति में सत्ता के करीबी ठेकेदारों ने ही नहीं बल्कि ‘माननीयों’ ने भी हाथ साफ किया। लोक आयुक्त ने अभी तक मिर्जापुर व चुनार के 18 खनन पट्टाधारकों व कंसोर्टियम सदस्यों के बयानों का परीक्षण किया है। जांच प्रभावित होने की संभावना के मद्देनजर बयान दर्ज कराने वाले पट्टाधारकों और कंसोर्टियम सदस्यों के नाम का खुलासा नहीं किया जा रहा है। लगभग सभी पट्टाधारकों ने यह स्वीकार किया है कि 2007-2011 के बीच लदान सहित पत्थरों की बाजार दर 40 से 60 रुपये प्रति घनफुट थी जबकि राजकीय निर्माण निगम ने 170 रुपये प्रति घनफुट की दर से भुगतान किया। उस समय पत्थरों की मांग ज्यादा थी इसलिए रेट 60-70 रुपये घनफुट तक पहुंच गया था लेकिन इस समय दर 30 रुपये प्रति घनफुट के आसपास है।
विधायक व उनके बेटे ने की आपूर्ति
मिर्जापुर के एक पट्टाधारक ने अपने लिखित बयान में कहा है कि पट्टा तो उसके नाम ही था लेकिन सारा काम विधायक शारदा प्रसाद व उनके बेटे राकेश ने किया। पट्टाधारक के अनुसार विधायक ने उसके साथ पार्टनरशिप बनाकर पत्थरों की आपूर्ति की। उन्हीं के नाम चेक आता था और पूरा भुगतान वही लेते थे। पट्टाधारक केहाथ कुछ भी नहीं आया।
संयुक्त खाता खोलकर हजम कर गए रकम
एक अन्य पट्टाधारक ने बताया कि कंसोर्टियम तो उसके पिता राम जनम सिंह के नाम बनाया गया लेकिन काम मिलिंद कुमार सिंह नामक व्यक्ति करता था। मिलिंद ने राम जनम के साथ संयुक्त खाता खोला था लेकिन उन्हें फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। मिलिंद ने राम जनम को यह कहते हुए कुछ भी देने से इनकार कर दिया कि पत्थरों की आपूर्ति में घाटा हो गया है। राम जनम की मृत्यु भी हो गई है।
कटौती करके किया गया भुगतान
नोएडा के स्मारक के लिए पत्थरों की आपूर्ति करने वाले एक पट्टाधारक ने बताया कि उसे 33 फीसदी कटौती करके भुगतान किया गया तो एक अन्य पट्टाधारक ने अय्यूब खान नामक व्यक्ति को पावर ऑफ अटार्नी देने की बात कही है।

‘स्मारक निर्माण घोटाले की जांच अभी चल रही है। ईओडब्ल्यू के जरिये ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और इंजीनियरों केबयान दर्ज कर रहा है। कलमबंद किए गए कुछ बयान और साक्ष्यों के परीक्षण से पता चला है कि एक तत्कालीन विधायक शारदा प्रसाद भी पत्थरों की आपूर्ति करने वालों में शामिल थे। इनसे भी पूछताछ की जाएगी।’
न्यायमूर्ति एन.के. मेहरोत्रा, लोक आयुक्त

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