एमिटी लॉ स्कूल में हुई मानवाधिकार पर चर्चा

Noida Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
नोएडा। मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस केजी बालाकृष्णन का कहना है कि मौलिक अधिकार समाज के हर वर्ग के लिए समान होता है। इसके अंतर्गत समाज के हर वर्ग के लोग आते हैं। भारत जैसे विकासशील देश में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है। ये अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होते, जिसकी वजह से उनके अधिकारों का हनन होता है।
एमिटी विश्वविद्यालय में लॉ स्कूल सेंटर द्वितीय द्वारा ‘मानवाधिकार और मानवीय गरिमा राज्यों के लिए चुनौती’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी में उन्होंने ये बातें कहीं। राष्ट्रीय मानवधिकार आयोग के सहयोग से हुई संगोष्ठी में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस केसी सूद ने कहा कि न्यायालय की कोशिश कोई भी फैसला सुनाने या लेने से पहले किसी के भी मानवाधिकर का हनन न होने देना सुनिश्चित करना होती है। दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एसके अग्रवाल ने कहा कि मानवाधिकार को समझने के लिए हमें इसके इतिहास को समझना होगा। सूचना और प्रौद्योगिकी के इस युग में भी मानवाधिकारों का हनन हो रहा है, जो हमारे लिए चुनौती है।

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