श्रीराम अयोध्या के सिंहासन पर हुए विराजमान

Noida Updated Fri, 26 Oct 2012 12:00 PM IST
नोएडा। शहर में अलग-अलग जगह बृहस्पतिवार को रामलीला संपन्न हो गई। इससे पहले लंका पर विजय पाकर श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के साथ अयोध्या लौटने का मंचन हुआ। भरत श्रीराम से लिपटकर खूब रोते हैं। सभी से भेंट मुलाकात के बाद गुरु वशिष्ठ श्रीराम का राजतिलक कराते हैं।
श्री धार्मिक लीला समिति, नोएडा स्टेडियम
‘परे भूमि नहिं उठत उठाए, बर करि कृपासिंधु उर लाए, स्यामल गात रोम भए ठाढ़े, नव राजीव नयन जल बाढ़े।’ भरतजी प्रभु राम के चरणों में पड़े हैं। उठाए नहीं उठ रहे, श्रीराम ने उन्हें जबरदस्ती उठाकर हृदय से लगा लिया। इस दौरान नवीन कमल के समान नेत्रों में जल की बाढ़ आ गई। दो भाइयों का इतना अमिट प्रेम देखकर वहां खड़े मुनिगण और अयोध्यावासी रो पड़े। भरत मिलाप के बाद मुनि वशिष्ठ राम का राज तिलक कराते हैं और राम अयोध्या के राजा बनते हैं। इस दौरान समिति के पदाधिकारियों ने रामलीला के कलाकारों को सम्मानित भी किया।
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सनातन धर्म रामलीला समिति, रामलीला ग्राउंड, सेक्टर 33
‘राजीव लोचन स्नवत जल तन ललित पुलवावलि बनी, अति प्रेम हृदय लगाई अनुजहि मिले प्रभु त्रिभुअन धनी...।’ प्रभु राम भाई भरत को गले लगाकर रो रहे हैं। कमल के समान नेत्रों से जल बह रहा है। सुंदर शरीर में पुलकावली शोभा दे रही है। वर्षों से विरह में पड़े भाई एक-दूसरे से बार-बार कुशलक्षेम पूछ रहे हैं। भरत मिलाप केबाद श्रीराम का राज तिलक और अयोध्या में फिर से रौनक लौटने तक का दृश्य है। यहां के कलाकारों को भी समिति के पदाधिकारियों को सम्मानित गया।
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बजरंग रामलीला संचालिका समिति, सेक्टर 12
अयोध्यावासी श्रीराम के आगमन में व्याकुल हुए जा रहे हैं। अचानक हनुमानजी अयोध्या में प्रकट होते हैं और भरत से मिलते हैं। भरतजी भगवान राम के वियोग में अत्यंत दुर्बल हो गए हैं। हनुमानजी ने भरत के चरणों में मस्तक नवाकर श्रीरघुनाथजी के बारे में बताते हैं। भरतजी पूछते हैं कि प्रभु राम अपने दास की तरह मुझे कभी याद करते हैं। इस पर हनुमानजी कहते हैं कि भगवान राम उन्हें बहुत याद करते हैं और शीघ्र यहां पहुंच रहे हैं। यहां राम के राजतिलक के यज्ञ का मंचन होता है।
महर्षि रामलीला समिति, महर्षि आश्रम
भगवान राम को देखकर मुनि वशिष्ठ ने तुरंत दिव्य सिंहासन मंगवाया, जिसका तेज सूर्य के समान था। मुनि को प्रणाम कर श्रीरामचंद्र दिव्य सिंहासन पर विराजमान हो गए। यह देखकर माताएं हर्षित हो रही थीं। सबसे पहले मुनि वशिष्ठ ने श्रीराम का राज तिलक किया। इसके बाद अन्य ऋषिगणों ने उनका तिलक किया। सभा में भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न, हनुमानजी, सुग्रीव, अंगद और विभीषण छत्र, चवर, पंखा, धनुष, शक्ति, तलवार आदि लिए सुशोभित हैं। पूरी अयोध्या नगरी हर्ष में डूबी है।

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