‘संघर्ष के दिनों को कभी न भूलें’

Noida Updated Thu, 18 Oct 2012 12:00 PM IST
नोएडा। हिंदी फिल्मों में अलग मुकाम रखने वाले अभिनेता विनय पाठक का कहना है कि अभिनय की दुनिया में रंगमंच से जुड़ना जरूरी है। रंगमंच से आने के बाद कलाकार अपना 100 फीसदी देता है। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि इंसान को अपने अच्छे और बुरे दिनों में संघर्ष के दिनों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
विनय पाठक बुधवार को एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (एएएफटी) में आयोजित अभिनय कार्यशाला में छात्रों से रूबरू हुए। इस मौके पर उन्होंने संस्थान के निदेशक संदीप मारवाह के साथ नवंबर में होने वाले ग्लोबल फिल्म फेस्टिवल का पोस्टर भी जारी किया।
छात्रों के साथ अपना अनुभव बांटते हुए उन्होंने कहा कि एक संस्कारी इंसान बनना जरूरी है क्योंकि यही हमें हमारी जड़ों से जोड़कर रखता है। साथ ही अपनी फिल्मों के डायलॉग सुनाकर छात्रों को खूब हंसाया। फायर में एक छोटे से रोल के बाद भेजा फ्राई, खोसला का घोंसला, आजा नच ले, रब ने बना दी जोड़ी, जैसी कई फिल्मों में काम किया।

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