विश्व एंटीरेबीज दिवस पर विशेष

Noida Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
नोएडा। नियमित टीकाकरण को लेकर लोग भले जागरूक न हों, लेकिन एंटीरेबीज टीके लगवाने में आगे हैं। अकेले जिला अस्पताल में एंटीरेबीज टीकाकरण पर सालाना 14 लाख रुपये खर्च होते हैं, जबकि नियमित टीकाकरण पर व्यय इसका 50 फीसदी भी नहीं है। डॉक्टरों की मानें तो 50 फीसदी लोगों को एंटीरेबीज टीके की जरूरत नहीं होती, लेकिन वे लगवाते हैं।
जिला अस्पताल की फिजीशियन डॉ. रेनू अग्रवाल ने बताया कि रेबीज पीड़ित पशु के काटने से रेबीज होती है। पशु बीमार है या नहीं, इसका निर्धारण लक्षणों से किया जा सकता है। काटने वाले पशु की दस दिन के भीतर मौत हो जाए, तभी एंटीरेबीज टीका लगवाना चाहिए। पशु रेबीज से पीड़ित नहीं है तो टीके की जरूरत नहीं है। 50 फीसदी से ज्यादा लोग जानवर के काटने पर ही टीका लगवाने पहुंच जाते हैं।
इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. जीसी वैष्णव बताते हैं कि पालतू जानवर को टीका लगा होने के बावजूद उसके काटने पर लोग एंटीरेबीज टीका लगवाते हैं। लोगों में रेबीज को लेकर काउंसलिंग की जरूरत है। लोगों को जागरूक कर एंटीरेबीज पर व्यर्थ खर्च हो रही काफी राशि बचाई जा सकती है।

क्या है रेबीज-वायरस से होने वाली बीमारी। यह मुख्य तौर पर जंगली जानवरों में पाया जाता है। पीड़ित जानवर के काटने पर त्वचा में लार के जरिये यह वायरस प्रवेश कर जाता है। इससे तंत्रिकाएं संक्रमित हो जाती हैं। दिमाग में संक्रमण पहुंचने पर पीड़ित के व्यवहार में बदलाव होने लगता है। सांस लेने और निगलने में दिक्कत होने पर उसका खाना-पीना छूट जाता है। ऐसे में उसकी मौत हो जाती है।

85 फीसदी कारण कुत्ते
कुत्ते के काटने के चलते 85 फीसदी मरीज रेबीज से पीड़ित होते हैं। 15 फीसदी मामलों में बिल्ली, कुत्ता, घोड़ा, बंदर आदि इस बीमारी की वजह हैं।

जानवर में रेबीज के लक्षण
- मुंह से लार टपकती रहती है।
- बेचैन रहता है।
- आंखें लाल रहती हैं।
- लोगों को काटने दौड़ता है।
- सांस लेने में दिक्कत होती है।
- दस दिन के भीतर उसकी मौत हो सकती है।

इंसान में रेबीज के लक्षण
- बेचैनी
- खाना-पानी निगलने में दिक्कत होना।
- सांस लेनें में तकलीफ

डोज
- कुत्ते और बिल्ली को तीन माह की उम्र के भीतर एंटी रेबीज का पहला टीका लगाया जाता है। इनकी मां को यदि टीका लगा है तो तीन महीने पर ही टीका लगवाना चाहिए। इसके बाद प्रतिवर्ष एक टीका लगाया जाता है। सड़क के कुत्ते को किसी भी उम्र में टीका लगाया जा सकता है।
- जानवर के काटने पर रेबीज की बीमारी न हो, इसके लिए पहले ही लोग एक माह में डॉक्टर की सलाह पर एंटीरेबीज के तीन टीके लगवाकर खुद को सुरक्षित कर सकते हैं।
- जानवर के काटने के बाद एक माह में पांच डोज और 90 दिन के बाद बूस्टर टीका लगाया जाता है।

इंट्राडर्मल एंटीरेबीज इंजेक्शन की सलाह-
स्वास्थ्य मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अस्पतालों को इंट्राडर्मल एंटीरेबीज टीके की सलाह दी है। जानकारों के मुताबिक अमूमन रोगियों की मांसपेशियों में इंजेक्शन दिया जाता है। इससे एक मल्टीडोज वैक्सीन करीब तीन मरीजों के लिए इस्तेमाल हो पाती है। इंट्राडर्मल विधि में वैक्सीन मांसपेशियों में न लगाकर ऊपर की खाल में लगाई जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इस तरीके से वैक्सीन करीब दस लोगों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।

एक नजर टीकाकरण पर
- जिला अस्पताल में हर माह औसतन 2100 लोग एंटीरेबीज टीके लगवाते हैं। बीते सोमवार को इस साल में सबसे ज्यादा 120 टीके लगाए गए थे।
- प्रमुख निजी अस्पतालों में इस टीके को लगवाने वालों की संख्या प्रत्येक माह 30 से 35 है।
- सरकारी संस्थाओं में एंटीरेबीज का टीका मुफ्त लगाया जाता है। प्राइवेट में इसकी कीमत 400 रुपये के आसपास है।
जच्चा-बच्चा नियमित टीकाकरण
- जिला अस्पताल में बच्चों का दो दिन, जबकि महिलाओं नियमित टीकाकरण होता है।
- एक महीने में औसतन 500 टीके लगाए जाते हैं।

Spotlight

Most Read

Kanpur

बाइकवालाें काे भी देना हाेगा टोल टैक्स, सरकार वसूलेगी 285 रुपये

अगर अाप बाइक पर बैठकर आगरा - लखनऊ एक्सप्रेस वे पर फर्राटा भरने की साेच रहे हैं ताे सरकार ने अापकी जेब काे भारी चपत लगाने की तैयारी कर ली है। आगरा - लखनऊ एक्सप्रेस वे पर चलने के लिए सभी वाहनों को टोल टैक्स अदा करना होगा।

16 जनवरी 2018

Related Videos

नोएडा में कपड़ा फैक्ट्री के इस गार्ड की हत्या कर लूटे 12 लाख रुपये

नोएडा में गार्ड की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बदमाशों ने की बेखौफ होकर इस वारदात को एक गार्मेंट कंपनी में अंजाम दिया। यही नहीं बदमाशों ने फैक्ट्री के लॉकर से 12 लाख रुपये भी लूट लिए।

15 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper