होटल गोल्फ व्यू की सील खुली

Noida Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
नोएडा। पिछले तीन माह से चर्चा में रहे होटल गोल्फ व्यू की सील जिला प्रशासन ने खोल दी। इस होटल के मालिकों पर ग्राम समाज की जमीन के दस्तावेजों में धोखाधड़ी कर खरीद फरोख्त कर होटल बनाने का आरोप है। आरोपियों में होटल मालिक देवेंद्र कुमार गंगल के अलावा प्राधिकरण के पूर्व प्रमुख अभियंता यादव सिंह और उनकी रिश्तेदार विद्यादेवी समेत आठ लोग शामिल हैं। जिनके खिलाफ थाना सेक्टर-39 पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है।
अपर मुख्य अधिकारी सुभाष चंद्र मिश्र ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह सेक्टर-37 में हरिजन बस्ती से सटे होटल गोल्फ व्यू में जिला प्रशासन द्वारा लगाई गई सील को खोल दिया गया। मिश्र के अनुसार अदालत ने निर्देश दिया था कि अपर मुख्य अधिकारी इस मामले में अपने स्तर पर जांच कर निर्णय लें। इसके बाद सील को खोलने का निर्णय लिया गया। सील खुलने की जानकारी पाकर थाना सेक्टर-39 प्रभारी भी मौके पर पहुंच गए। तब तक जिला प्रशासन की टीम सील खोल कर जा चुकी थी। मालूम हो कि होटल गोल्फ व्यू मामला तब चर्चा में आ गया था जब इस होटल के आरोपियों में प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह व उनके रिश्तेदार विद्यादेवी का नाम जुड़ गया। एफआईआर में होटल मालिक देवेंद्र कुमार गंगल, विद्यादेवी का नाम दर्ज था, लेकिन जब जांच आगे बढ़ी तो जांच के दायरे में यादव सिंह समेत छह और लोग आ गए। जांच कर रही पुलिस ने यादव सिंह समेत सभी आरोपियाें की गिरफ्तारी के प्रयास में कई जगह छापेमारी भी की। 17 अगस्त को उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट और कुर्की के आदेश भी ले लिए लेकिन अदालत ने इन आदेशों को 18 अगस्त को निरस्त कर दिया। आदेश के खिलाफ थाना सेक्टर-39 पुलिस ने जिला जज के यहां याचिका दायर की है। जिस पर सुनवाई होना बाकी है।

क्या था मामला
एक जून को होटल गोल्फ व्यू के मालिक रजत विहार सेक्टर-62 निवासी देवेन्द्र कुमार गंगल व तत्कालीन जिला पंचायत व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120बी, लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया गया। इसके लिए एसडीएम दादरी द्वारा दिसंबर 11 को प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई रिपोर्ट को आधार बनाया गया है। जिन्होंने रिपोर्ट दी थी कि 14 मई 76 को गांव छलेरा बांगर के खसरा नंबर 97 को प्राधिकरण ने अधिग्रहीत कर लिया था। जिसे वर्ष 2010 में शासन के आदेश पर डीनोटिफाइ किया गया। इसके बाद इस खसरा नंबर पर होटल बना दिया गया। होटल बनाने वाली कंपनी को यह जमीन कैसे मिली इसका जिक्र नहीं किया गया है। जिला पंचायत के अधिकारियों ने इस होटल का मानचित्र भी पास कर दिया। जबकि उनको इसका अधिकार ही नहीं था। यह अधिकार प्राधिकरण के पास था। जांच में पता चला कि होटल में यादव सिंह की अहम हिस्सेदारी है। इस आधार पर उनके खिलाफ भी मामला दर्ज कर कई बार पुलिस ने छापेमारी की है।

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