जनाब! जरूरी नहीं मजबूरी है पुलिस कमिश्नरी

Noida Updated Tue, 28 Aug 2012 12:00 PM IST
नोएडा। जनाब! नोएडा में जरूरी नहीं मजबूरी है पुलिस कमिश्नरी। कारण है एनसीआर में दिल्ली के अलावा दो बड़े शहरों गुड़गांव व फरीदाबाद में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू है। अधिकांश लोग नोएडा इन्हीं शहरों से नौकरी या बिजनेस करने आते जाते हैं। नोएडा पुलिस की कार्यशैली इन शहरों से अलग देख हैरान परेशान रहते हैं। आज नहीं तो आने वाले दिनों में कमिश्नरी होने की मांग उठने लगेगी। दूसरा नोएडा का नाम सुनते ही देश विदेश में लोग इसे तेजी से विकसित होते शहर की संज्ञा देते हैं, लेकिन जब कानून व्यवस्था की बात होती है तो लोगों की राय एक दम से बदल जाती है। अगर शासन की योजना परवान चढ़ी तो आने वाले कुछ सालों में चौपट होती कानून व्यवस्था में सुधार दिखाई देगा। कानून व्यवस्था को लेकर निर्णय लेने के लिए जिलाधिकारी का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। पुलिस का अधिकारी ही निर्णय लेकर त्वरित कार्रवाई के आदेश दे देगा। यह सब होगा नोएडा में कमिश्नर प्रणाली लागू होने पर। लेकिन इस प्रणाली को लागू कराने में अभी कई पेंच हैं। मामला आईपीएस बनाम आईएएस के बीच एक बार फिर फंस सकता है। वहीं, कुछ राजनेता भी इस प्रणाली के विरोध में खड़े हो सकते हैं। क्योंकि इससे राजनैतिक दखल भी पुलिस में कम होगा। प्रणाली लागू होने से जिले में आईएएस अधिकारी सीमित हो जाएंगे।
शासन स्तर पर प्रदेश के कई शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव लंबित है। इसको लेकर मुख्यमंत्री द्वारा दिलचस्पी दिखाते ही शासन में धूल फांक रही फाइलें एक बार फिर दौड़ने लगी हैं। अगर शासन की योजना परवान चढ़ी तो कैबिनेट की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है। इसके साथ ही नोएडा प्रदेश का पहला जिला बना जाएगा जहां यह यह प्रणाली लागू होगी।
जानकारों के मुताबिक शहर में सबसे ज्यादा समस्या लॉ एंड आर्डर की है। किसान आंदोलन से लेकर प्राधिकरण पर आए दिन किसी न किसी संगठन का धरना प्रदर्शन और यातायात व्यवस्था की परेशानी पुलिस के लिए खड़ी रहती है। कमिश्नर प्रणाली लागू होने से प्रशासनिक अधिकार भी पुलिस अधिकारी को मिल जाएंगे। ऐसे में शहर की कानून व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों या शासन के आदेशों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अधिकारी खुद त्वरित समस्या के निदान के लिए निर्णय ले सकता है। इसके अलावा जिले में पुलिस बल की संख्या बढ़ेगी और जोन स्तर पर थानेवार अपराध की समीक्षा व उसके रोकने के उपाय के लिए पुलिस अधिकारी तैनात किए जाएंगे, जिनकी जिम्मेदारियां पहले से ज्यादा हो जाएगी।

कमिश्नर प्रणाली के फायदे :
---------------------
-शस्त्र लाइसेंस के लिए डीएम के बजाए पुलिस करेगी संस्तुति। अब तक पुलिस केवल रिपोर्ट लगा कर डीएम के पास भेजती है। प्रणाली लागू होने के बाद कमिश्नर ही सीधे लाइसेंस जारी कर सकता है।
-जिलाधिकारी के अधिकार क्षेत्र सीमित रह जाएंगे
-शांति भंग की धारा में गिरफ्तार व्यक्ति पर जमानत की कार्रवाई का अधिकार, इसके लिए सिटी मजिस्ट्रेट या एसडीएम केपास नहीं जाना पडे़गा
-पोस्टमार्टम के लिए एसडीएम व सिटी मजिस्ट्रेट की संस्तुति का इंतजार या उनके मौैके पर पहुंचने का इंतजार नहीं करना होगा
-धारा-144 लागू करने का अधिकार अब तक यह अधिकार डीएम के पास ही है। वह पुलिस रिपोर्ट पर इसे लागू करता है। प्रणाली लागू होने पर पुलिस कमिश्नर ही यह आदेश लागू कर सकता है
-रैली प्रदर्शन के लिए सिटी मजिस्ट्रेट या डीएम के बजाए पुलिस देगी अनुमति
-ट्रैफिक की पूरी जिम्मेदारी अब तक यातायात परिवहन विभाग का दखल है
-फायर के लिए एनओसी की जिम्मेदारी, अब तक पुलिस रिपोर्ट पर जिला प्रशासन ही एनओजी देता है।
-----------

एनसीआर के दो जिलों में लागू है व्यवस्था
दिल्ली के बाद एनसीआर के दो जिलों में यह व्यवस्था लागू है। दिल्ली के बाद उससे सटे हरियाणा के फरीदाबाद व गुड़गांव में कमिश्नर प्रणाली लागू है। जिसके बेहतर परिणाम भी सामने आए हैं। छोटे से इन जिलो में चार से पांच आईपीएस अधिकारी तैनात है। जिनके सेक्टर बंटे व कार्य बंटे हुए है। जो सीधे कानून व्यवस्था व अपराध पर कंट्रोल करने में समक्ष है। दिल्ली से सटे यूपी के नोएडा में यह व्यवस्था लागू होने से यहां रहने वालों को भी सहूलियत होगी। नोएडा में रहने वाले व काम करने वाले अधिकांश लोग दिल्ली, फरीदाबाद या गुड़गांव में नौकरी करते हैं या फिर वहां से आते हैं। ऐसे में जब भी उनका पाला इन शहरों में पड़ता है तो पुलिस का पूरा सिस्टम नोएडा से अलग ही दिखता है।

34 साल पहले शुरू हुई थी प्रक्रिया
यूपी में कमिश्नर प्रणाली लागू की जाए इसके लिए वर्ष 1978 में मुख्यमंत्री रामनरेश यादव ने एक योजना तैयार करने के लिए दो आईपीएस अधिकारियों को कहा था। उन्होंने योजना तैयार की और पूरा खाका तैयार करके दे दिया। कमिश्नर प्रणाली कानपुर में लागू होनी थी, लेकिन आईएएस लॉबी ने उसे कैबिनेट बैठक में खारिज करा दिया। इसके बाद से कई बार प्रस्ताव बने लेकिन हर बार ठंडे बस्ते में चले गए। जबकि आज भी आईपीएस अधिकारी इस प्रणाली की वकालत करते हैं।

Spotlight

Most Read

Shimla

कांग्रेस के ये तीन नेता अब नहीं लड़ेंगे चुनाव, चुनावी राजनीति से लिया संन्यास

पूर्व मंत्री एवं सांसद चंद्र कुमार, पूर्व विधायक हरभजन सिंह भज्जी और धर्मवीर धामी ने चुनाव लड़ने की सियासत को बाय-बाय कर दिया है।

17 जनवरी 2018

Related Videos

नोएडा में कपड़ा फैक्ट्री के इस गार्ड की हत्या कर लूटे 12 लाख रुपये

नोएडा में गार्ड की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बदमाशों ने की बेखौफ होकर इस वारदात को एक गार्मेंट कंपनी में अंजाम दिया। यही नहीं बदमाशों ने फैक्ट्री के लॉकर से 12 लाख रुपये भी लूट लिए।

15 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper