नोएडा एक्सटेंशन : हजारों करोड़ रुपये लगे थे दांव पर

Noida Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
ग्रेटर नोएडा। एनसीआर में सबसे चर्चित नोएडा एक्सटेंशन विवाद में हजारों करोड़ रुपये दांव पर लगे थे। समाधान के बाद वैसे तो सबके चेहरे पर खुशी है, लेकिन सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान ग्रेनो प्राधिकरण को ही हुआ। बिल्डरों ने नुकसान की भरपाई फ्लैटों के दाम बढ़ाकर की।
नोएडा एक्सटेंशन में दो हजार हेक्टेयर में सिर्फ बिल्डरों को प्राधिकरण ने प्लाट दिए थे। जिसमें छोटे-बड़े मिलाकर करीब 100 बिल्डर हो गए। वैसे तो 70 बिल्डरों को जमीन मिली थी, लेकिन उन्होंने छोटे-छोटे टुकड़ों में बिल्डरों को जमीन दे दी थी। नोएडा एक्सटेंशन में बिल्डरों ने करीब 10 हजार करोड़ रुपये लगा दिए। जमीन का आवंटन और निर्माण में पैसा खर्च हुआ। हालांकि करीब एक लाख फ्लैट बुक भी हो गए, लेकिन उनसे ज्यादा धन नहीं मिला। कोर्ट में विवाद फंसने के बाद बिल्डरों ने प्राधिकरण को किस्त देनी बंद कर दी। निवेशक भी चुप बैठ गए। बैंकों ने भी निवेशक, बिल्डरों के पैसों को रोक दिया था। ग्रेनो प्राधिकरण ने नोएडा एक्सटेंशन में विकास कराने के लिए करीब तीन हजार करोड़ रुपये खर्च कर दिए। काम रुकने के बाद विकास कार्य भी बेकार हो गए। सड़कें टूट गईं और निर्माण सामग्री खराब हो गई। अब प्राधिकरण को इतने ही पैसे और खर्च करने होंगे, तब जाकर विकास कार्य चालू हो सकेंगे।
विवाद का खामियाजा ठेकेदारों को भी उठाना पड़ा। बिल्डरों और प्राधिकरण ने इसलिए भुगतान नहीं किया क्योंकि कार्य पूरा नहीं हो सका था। लिहाजा करीब दो हजार करोड़ रुपये की चपत ठेकेदारों को भी लगी है। हजारों की संख्या में काम कर रहे मजदूरों को बिना तनख्वाह ही जाना पड़ा। किसानों ने भी कई बार तोड़फोड़ की, जिसका नुकसान सीधे बिल्डरों को पहुंचा। चूंकि अब नए सिरे से सबकुछ करना होगा। जो काफी महंगा पड़ेगा।

प्राधिकरण को झटका पर झटका लगा
बिल्डरों ने किस्त नहीं दी। जितने समय तक कोर्ट में विवाद रहा, उस दौरान तक कोई पेनाल्टी नहीं लगेगी। ग्रेनो के करीब 30 हजार आवंटियों ने प्राधिकरण को किस्त देनी बंद कर दी थी। हालात यह हो गए कि प्राधिकरण पर धीरे- धीरे करीब छह हजार करोड़ रुपये का कर्ज हो गया। हर माह 200 करोड़ रुपये का कर्ज देना पड़ रहा है। बैंकों ने प्राधिकरण को कर्ज देना इसलिए बंद कर दिया था, क्योंकि प्राधिकरण के पास गिरवी रखने के लिए जमीन नहीं थी। सच्चाई यह है कि विवाद और खिंचता तो प्राधिकरण दिवालिया ही हो जाता।

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