अक्तूबर से प्रदेश में बढ़ेंगी बिजली दरें

Noida Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
नोएडा। बिजली की बढ़ी दरों का झटका उपभोक्ताओं को बहुत जल्द लगने वाला है। एक अक्तूबर से बिजली की नई दरें लागू करने की तैयारी लगभग पूरी की जा चुकी हैं। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के तहत शनिवार को विद्युत नियामक आयोग के अधिकारियों ने शनिवार को नोएडा पहुंचकर जन सुनवाई की। इस दौरान प्रदेश भर से पहुंचे उद्यमियों ने दरें बढ़ाने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्तियां दर्ज कराते हुए जबरदस्त नाराजगी जाहिर की।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के तहत आने वाली बिजली वितरण कंपनियों ने आठ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा दर्शाते हुए दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा था। जिसमें कंपनियों की तरफ से वर्ष 2010-11, 2011-12 एवं 2012-13 के लिए वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) तथा टैरिफ के निर्धारण के लिए याचिकाएं दाखिल की गई थी। इसको लेकर मई से शुरू हुई जद्दोजहद को अब अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पर काम शुरू हो गया है। जिसके तहत जन सुनवाई का आयोजन किया गया। हालांकि बिजली की नई दरों का स्वरूप कैसा होगा, इसका निर्धारण जन सुनवाई पूरी होने के बाद ही हो सकेगा। लेकिन नियामक आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि नई दरें एक अक्तूबर से लागू होंगी।
शनिवार को जन सुनवाई के दौरान नोएडा एंट्रप्रिनियोर्स एसोसिएशन (एनईए) ने कड़ी आपत्ति जताते हुए बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव का विरोध किया। एनईए प्रतिनिधियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन अपनी गलतियों से घाटे में जा रहा है और इसका खामियाजा उद्योगों को भुगतना पड़ रहा है। नोएडा का सेंक्शन लोड 1937 मेगावाट निर्धारित है, लेकिन 680 से 800 मेगावाट ही बिजली शहर को दी जा रही है। इसके बावजूद बिजली की दरों में भारी बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है। ऐसा किया गया तो नोएडा के उद्योग बर्बाद हो जाएंगे। बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव का तीखा विरोध फोनरवा (फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन) ने भी किया।
नोएडा और गाजियाबाद के ही नहीं बल्कि मुजफ्फरनगर, मेरठ, साहिबाबाद, मुरादनगर, सहारनपुर और लखनऊ से आए उद्यमियों ने भी जन सुनवाई के दौरान अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। मिनिमम कंजप्शन चार्ज का विरोध करते हुए सभी उद्यमियों का एक सुर में कहना था कि जब प्रदेश में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता ही नहीं है तो मिनिमम चार्ज क्यों वसूला जा रहा है। उपभोक्ताओं की आपत्तियां सुनने के बाद राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष राजेश अवस्थी ने अमर उजाला को बताया कि नई दरें एक अक्तूबर से लागू करना तय है, प्राप्त हुई आपत्तियों के आधार पर यह देखा जाएगा कि दरें क्या हों। इस अवसर पर अवस्थी के अलावा आयोग की सदस्य मीनाक्षी सिंह व श्रीराम सहित अधीक्षण अभियंता मोहम्मद गुफरान और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक अमित गुप्ता मौजूद भी रहे।
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घरेलू उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकती है मार
ग्रामीण घरेलू और शहरी घरेलू श्रेणी की बिजली दरें न बढ़ाए जाने का प्रस्ताव बिजली वितरण कंपनियों की तरफ से नियामक आयोग को भेजा गया है, जिसका जन सुनवाई के दौरान उद्यमियों ने जमकर विरोध किया। उद्यमियों ने स्पष्ट कहा कि दूसरों का बोझ उद्योगों पर डालना ठीक नहीं है। उद्यमियों के इस तर्क को नियामक आयोग ने गंभीरता से लिया है। आने वाले दिनों में घरेलू श्रेणी की बिजली दरों में बढ़ोतरी के संकेत भी आयोग की तरफ से दिए गए हैं।

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