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यूपी: तेजी से बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा, श्मशान घाटों पर अव्यवस्था का आलम, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Wed, 21 Apr 2021 01:39 AM IST

सार

कोरोना महामारी के बीच मुजफ्फरनगर शहर में मौत का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है।
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मुजफ्फरनगर में अंतिम संस्कार करते कर्मचारी।
मुजफ्फरनगर में अंतिम संस्कार करते कर्मचारी। - फोटो : amar ujala

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विस्तार

कोरोना महामारी के बीच मुजफ्फरनगर शहर में मौत का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। शहर के श्मशान घाटों और कब्रिस्तान में जहां प्रतिदिन पांच से दस तक शव पहुंचते थे, वहां अब एक दिन में 25 का आंकड़ा पार हो रहा है। कोरोना संक्रमितों का शव सीधे श्मशान घाट पहुंच रहा है, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं है। श्मशान घाटों पर अव्यवस्था का आलम होने से अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। श्मशान घाट के कर्मचारियों को पीपीई किट तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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एक सप्ताह से शहर में कोरोना संक्रमितों की होने वाली मौत का आंकड़ा लोगों को डरा रहा है। शहर में सभी श्मशान घाट और कब्रिस्तान में एक दिन में पांच से दस तक शव ही पहुंचते थे, लेकिन यह संख्या अचानक कई गुना हो गई है। 19 अप्रैल को शहर में 27 लोगों के शवों का क्रियाकर्म हुआ। इनमें नईमंडी श्मशान घाट में 11, शहर में नदी घाट पर पांच और चारों कब्रिस्तानों में 11 की अंतिम क्रिया हुई। 20 अप्रैल मंगलवार को अकेले नदी घाट श्मशान घाट में दस का अंतिम संस्कार हुआ। इसी दिन चार कोरोना संक्रमित की भी अंतिम क्रिया हुई। इनमें दो नदी घाट, एक नईमंडी और एक शव सरवट कब्रिस्तान में पहुंचा। नईमंडी शमशान घाट समिति के अध्यक्ष संजय मित्तल का कहना है कि वह कोरोना संक्रमित के अंतिम संस्कार परिजनों के द्वारा बिना पीपीई किट पहने नहीं होने दे रहे हैं।


मृतकों में 50 प्रतिशत 60 से 65 वर्ष के
श्मशान घाट और कब्रिस्तान में जो शव पहुंच रहे हैं उनमें टोटल के 50 प्रतिशत 60 से 65 वर्ष के हैं। ये वो लोग हैं, जो अचानक बीमारी के चपेट में आए, इनकी मौत हो गई और अंतिम संस्कार हो गया। इन लोगों में 90 प्रतिशत की कोरोना की जांच ही नहीं हुई है। 25 प्रतिशत मृतक 60 साल से कम आयु के हैं और 25 प्रतिशत 65 से ऊपर की आयु के हैं।

नई मंडी श्मशान घाट में 20 दिन में सौ अंतिम संस्कार
भोपा रोड पर नईमंडी में स्थित श्मशान घाट में एक अप्रैल से 20 अप्रैल तक 100 अंतिम संस्कार हुए हैं। मार्च के पूरे माह में 69 और फरवरी माह में 82 लोगों का अंतिम संस्कार यहां हुआ है। यहां की देखरेख करने वाले कल्लू यादव का कहना है कि वह वर्ष 2006 से यहां पर हैं। अप्रैल माह में एक दिन में इतने शव कभी नहीं आए। 14 अप्रैल से शवों की संख्या बढ़ी है। 14 अप्रैल को यहां आठ शव आए, 15 को छह, 16 को 11, 17 को चार, 18 को सात और 19 अप्रैल के 11 शव आए। सामान्य रूप से एक से तीन शव ही इस माह में आते रहे हैं।

नदी घाट पर एक दिन में दस दाह संस्कार
नदी घाट स्थित शहर श्मशान घाट में मंगलवार को दो कोरोना संक्रमितों सहित दस लोगों का अंतिम संस्कार हुआ। परोपकारी सेवा समिति के अजय अग्रवाल ने बताया कि 14 अप्रैल से शवों की संख्या बढ़ी है। जहां प्रतिदिन एक या दो शव आते थे, 14 अप्रैल को यहां चार शव आए। 15 को चार, 16 को तीन, 17 को चार, 18 को आठ, 19 को पांच और 20 अप्रैल को दस शव यहां पहुंचे।

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