शेरपुर बवाल की वजह थी फर्जी सूचना, सवालों के घेरे में आया पुलिस का सूचना तंत्र

अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Sun, 04 Jun 2017 01:12 AM IST
भीड़ द्वारा जलाई गई कार।
भीड़ द्वारा जलाई गई कार। - फोटो : अमर उजाला
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शेरपुर बवाल में पुलिस कोई रियायत बरतने के मूड में नहीं है। गांव वालों ने तो कानून हाथ में लिया ही, पुलिस की लापरवाही भी कम जिम्मेदार नहीं है। एसएसपी अनंत देव तुरंत एक्शन नहीं लेते तो बवाल और व्यापक रूप ले सकता था। फिलहाल संबंधित चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया गया है। अधिकारियों ने सूचना तंत्र की जांच करने के लिए कहा है। 
शेरपुर का बवाल बड़ा हिंसक रूप भी ले सकता था। पुलिस ने बिना कोई तैयारी किए गांव में दबिश दी। पुलिस पूछताछ चल ही रही थी कि एकाएक भीड़ मौके पर एकत्र हो गई। नोकझोंक के बाद पुलिस की गाड़ियों में आगजनी की गई। योगी सरकार के अवैध बूचड़खाने बंद करने के बाद से मीट की किल्लत को लेकर विशेष समुदाय के लोगों में गहरा आक्रोश बना हुआ है। पुलिस ने अवैध कटान का काम बंद करा दिया था।

शेरपुर की घटना के पीछे भी इसको लेकर गुस्सा था। पुलिस गोकशी करने की सूचना पर छानबीन की। इसको लेकर लोगों का गुस्सा भड़कता चला गया। पुलिस को मिली फर्जी सूचना और पुलिस का मौके पर आधी-अधूरी तैयारी के बीच पहुंचना भी पुलिस की सूचना प्रणाली पर सवाल खड़े करता है। पुलिस ने यह जांच करने की कोशिश भी नहीं की कि उन्हें दी गई सूचना सही है या पुलिस को चकमा दिया जा रहा है। पुलिस ने आननफानन में मुखबिर में इतना भरोसा कैसे कर लिया।

गांव में बवाल के समय भीड़ पुलिस को इसी बात पर घेरे रही कि मुखबिर का नाम बताया जाए, जिसने सूचना दी है। पुलिस को अधकचरी सूचना की वजह से ही फजीहत का सामना करना पड़ा। ऐन वक्त पर एसएसपी अनंत देव तिवारी ने मामले का संज्ञान लिया और आसपास के थानों की फोर्स के साथ पीएसी को भी तत्काल मौके पर भेजा। फोर्स बढ़ने पर बवाली भाग खड़े हुए। बाद में खुद कप्तान गांव पहुंचे और लोगों को कार्रवाई के लिए चेताया। 
              

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