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10 साल में 10 बार मरी हूं: पीड़िता

Muzaffar nagar Updated Tue, 12 Feb 2013 05:30 AM IST
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मुजफ्फरनगर। जिस किशोरी ने 10 साल पहले यह दरिंदगी झेली, ‘अमर उजाला’ ने उसे ढूंढ निकाला। बातचीत में उसने कहा कि मैं 10 साल में 10 बार मरी हूं। घटना ने पूरी जिंदगी को बदलकर रख दिया। अब बसेड़ा को देखने का भी मन नहीं करता।
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बसेड़ा गांव में हैवानियत का शिकार बनी 15 साल की किशोरी अब दो बेटों की मां है। देवबंद क्षेत्र में रह रही पीड़िता की तीन साल पहले अपने भाई के दोस्त से शादी हो गई थी। पेशे से टैक्सी चालक पति के साथ पीड़िता अपनी गृहस्थी में व्यस्त है। 10 मई 2012 को अंतिम बार वह अदालत में गवाही के लिए आई थी। पीड़िता को मुकदमे का फैसला आने की भी जानकारी नहीं थी। ‘अमर उजाला’ ने एक परिचित के माध्यम से पीड़िता से बात की। उसका कहना था कि हमें भरोसा नहीं था कि जिसके घर में वह रह रहे हैं, वह ऐसी हैवानियत कर सकते हैं। भाई की गलती की उसे ऐसी सजा दी गई कि पूरी जिंदगी ही बदल गई। तंगहाली में पिता और भाई भी चल बसे। 10 साल कैसे कटे, बयां नहीं कर सकती। इस दौरान मैं 10 बार मरी हूं। बस, मां के सहारे ने जिंदा रखा। तमाम प्रलोभन दिए गए, तोहमत लगाई गई। अब तो बसेड़ा जाने को मन नहीं करता। गुनहगारों को सजा मिलने के सवाल पर पीड़िता ने कोई टिप्पणी करने के बजाय सिर्फ इतना कहा कि जैसा मेरे साथ हुआ, भगवान किसी के साथ न करे।

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