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‘देर से मिला न्याय भी अन्याय जैसा’

Muzaffar nagar Updated Tue, 12 Feb 2013 05:30 AM IST
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मुजफ्फरनगर। वेस्ट यूपी में बसेड़ा जैसी वीभत्स और हैवानियत भरी वारदात अपने पूरे करियर में नहीं देखी। मेरठ मंडल के पूर्व आईजी एएन कौल कहते हैं कि 30 साल की पुलिस सेवा में उन्होंने ऐसी घिनौनी घटना नहीं देखी।
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बसेड़ा कांड में 10 साल बाद आए फैसले पर ‘अमर उजाला’ ने कौल से बातचीत की। उन्होंने कहा कि देर से मिला न्याय भी अन्याय से कम नहीं है। अभी दोषियों के सामने हाईकोर्ट का रास्ता खुला है। इसे पीड़िता के लिए न्याय कैसे कहें। अनुभव के आधार पर कौल कहते हैं कि सूबे में उनकी तैनाती वाराणसी से लेकर मेरठ मंडल तक रही, लेकिन बदले की आग में बेकसूर नाबालिग के साथ हैवानियत की ऐसी घटना सामने नहीं आई। वेस्ट में वारदात के बदले वारदात का कल्चर रहा है। मुरादाबाद में तैनाती के समय दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने जब रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कहा तो पीड़िता ने इंकार कर दिया। उनका कहना था कि वह खुद बदला ले लेंगे। आजीवन कारावास पर उनका सवाल था सिर्फ 14 साल सजा ही क्यों, ताउम्र क्यों नहीं। अधिकतम मामलों में बुढ़ापा, बीमारी और जेल में बेहतर आचरण के आधार पर दोषियों की रिहाई हो जाती है। दिल्ली गैंगरेप के बाद जस्टिस वर्मा की रिपोर्ट से भी वह संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि लचर कानून में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिस्टम में बदलाव पर कोई पहल नहीं की गई है।

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