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अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर छापे, दो केंद्र सीज

Muzaffar nagar Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
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मुजफ्फरनगर, 10 दिसंबर। कन्या भ्रूण हत्या को लेकर स्वास्थ्य विभाग के छापे में अनियमितताएं पाए जाने पर शहर के दो अल्ट्रासाउंड केंद्रों को सीज कर दिया गया है। तनेजा हॉस्पिटल पर जांच टीम से दुर्व्यवहार के बाद एसडीएम सदर के निर्देश पर अल्ट्रासाउंड केंद्र पर ताला जड़ दिया गया है। पंजीकृत चिकित्सक के बजाय अंसारी रोड के चित्रा अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जांच करते पाए गए बीएएमएस चिकित्सक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया है।
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सरकार के निर्देश पर गर्भ में बेटियों की हत्या पर लगाम कसने के लिए पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत बनाई गई जिला समिति के अधिकारियों ने सोमवार को अंसारी रोड के अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच की। अभियान की प्रभारी सीएमएस डॉ. रंजना चौधरी के नेतृत्व में टीम ने एसबीआई की शाखा के पास संचालित चित्रा अल्ट्रासाउंड केंद्र पर छापा मारा। पंजीकृत चिकित्सक डॉ. वीके वर्मा के स्थान पर यहां बीएएमएस डॉ. विनोद कुमार अल्ट्रासाउंड करते पाए गए। जांच के बाद केंद्र को सीज कर संचालक डॉ. विनोद कुमार को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। चिकित्सक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम तनेजा हॉस्पिटल पहुंची। यहां गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड का लेखा-जोखा पूर्ण नहीं मिला। अधूरे फार्मों पर डॉ. तारिणी तनेजा कोई जवाब नहीं दे पाईं। चिकित्सक दंपति की टीम के साथ गरमागरमी हो गई। एसडीएम सदर एसवी सिंह के निर्देश के बाद टीम ने तनेजा अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला जड़ दिया। रेलवे रोड के अशोक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर पहुंची टीम को जांच में कोई खामी नहीं पाई गई। छापेमारी के दौरान समिति सदस्य अधिवक्ता डॉ. माधुरी सिंह, बीना शर्मा एवं स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहे।

अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों में हड़कंप
मुजफ्फरनगर। भ्रूण हत्या के अपराध से मुक्ति के लिए सरकार द्वारा पीसीपीएनडीटी एक्ट 1994 लागू किया गया है। इसके अंतर्गत बनाई गई जिला समिति के प्राधिकारी जिला मजिस्ट्रेट हैं। गर्भवती महिलाओं और शिशुओं की रक्षा के लिए अल्ट्रासाउंड की जांच का रिकॉर्ड रखने के कड़े निर्देश हैं। डीएम सुरेंद्र सिंह और सीएमओ डॉ. वीके जौहरी को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थी कि शहर के कई अल्ट्रासाउंड केंद्र फर्जी तरीके से अपात्र चिकित्सकों द्वारा चलाए जा रहे हैं। प्रशासन के कड़े रुख से अल्ट्रासाउंड केंद्र और पैथोलॉजी संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।

पंजीकृत अल्ट्रासाउंड जांच केंद्रों को अपने सभी रोगियों की जांच का ब्योरा दो साल तक रिकॉर्ड में रखना अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक माह की पांच तारीख तक केंद्र को यह ब्योरा सीएमओ कार्यालय में प्रस्तुत करना भी जरूरी है।
डॉ. रंजना चौधरी, सीएमएस, जिला महिला चिकित्सालय।
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