मुफलिसी में बेच दिया कलेजे का टुकड़ा

Muzaffar nagar Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
मुजफ्फरनगर। गरीबी से परेशान एक व्यक्ति ने अपने नवजात बेटे को ही बेच डाला। उसने यह सौदा एक दलाल के जरिए दिल्ली के एक दंपति को पौने दो लाख रुपये में किया।
इंसानियत को झकझोर देने वाला यह किस्सा है शहर के रामपुरी मोहल्ले का। यहां एक दंपति किराए पर रहता है। दंपति का पांच साल का एक बेटा और ढाई साल की बेटी थी। पेशे से मजदूरी करने वाला पिता किसी तरह अपना और दो बच्चों का पेट पाल रहा था। बीमारी ने उसे और कर्ज में दबा दिया। अभी हाल ही में दंपति को जुड़वा बेटे हुए। दो बेटे पैदा होने की खुशी पर मुफलिसी भारी पड़ गई। जच्चा-बच्चा की देखभाल के लिए वह हर परिचित, हर रिश्तेदार यहां तक कि पड़ोसियों के आगे गिड़गिड़ाया, लेकिन सभी ने मदद से हाथ खींच लिए। जिस कारण उसे और कर्ज लेना पड़ा, जिसके चलते कर्ज और उधारी की रकम बढ़ती गई। इसी दौरान अस्पताल में एक दलाल से उसकी मुलाकात हुई, जिसने उसे एक बेटा बेचने की सलाह दी। पहले तो वह नहीं माना, लेकिन इससे आसान रास्ता और कोई नहीं सूझ रहा था। उसने अपने कलेजे के टुकड़े को बेचने की ठान ली। दलाल ने 50 हजार रुपये के कमीशन पर दिल्ली के एक परिवार से ढाई लाख रुपये में बच्चा बिकवाने की पेशकश की, लेकिन सौदा एक लाख 71 हजार रुपये में तय हुआ। रकम लेने के बाद मासूम दिल्ली के परिवार के सुपुर्द कर दिया। दलाल को 15 हजार रुपये दिए गए थे, बाकी रकम से पीड़ित ने कर्ज और उधार चुकता कर दिया। पत्नी ने कैमरे के सामने कहा कि इस बात को लेकर एक माह तक पति से उसका झगड़ा भी रहा, लेकिन गरीबी के सामने वह बेबस थी, उसके चुप रहने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।
पहले भी उजागर हुए मामले
मुजफ्फरनगर। जिले में यह कोई पहला मामला नहीं है, जब बच्चे की खरीद-फरोख्त हुई हो। ऐसे कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। बावजूद इसके बच्चों की खरीद-फरोख्त का मामला जिले में थम नहीं पा रहा है। जिले में दलालों का एक बड़ा गिरोह सक्रिय है, जिनका जिले में ही नहीं बल्कि आसपास के कई प्रदेशों में नेटवर्क फैला है। प्रकाश में आए कई मामलों में इस बात के साक्ष्य भी मिल चुके हैं।
केस एक:
शहर कोतवाली क्षेत्र में रहने वाले संजय अरोरा से जुलाई माह में बच्चे बेचने वाले गिरोह ने 70 हजार रुपये ठग लिए थे, जबकि बच्चा दिल्ली में रहने वाले एक परिवार को दो लाख रुपये में बेच दिया था। इस मामले को ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
केस दो:
जिला चिकित्सालय में दिसंबर 2011 में एक महिला को बच्चा चुराते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया गया था। जिसको कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जिसने पूछताछ में बताया था कि वह बच्चे चुराने के बाद बेच देते हैं।
केस तीन:
रुड़की की एक एएनएम द्वारा शहर में वर्ष 2011 में एक बच्चा बेच दिया था। मामला खुला तो खरीददार समेत एएनएम जेल गई थी।
‘अगर ऐसा हुआ है तो यह एक गंभीर मामला है। पीड़ित की हरसंभव सहायता कराई जाएगी। कांशीराम आवास योजना में मकान के साथ ही आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।’
-सुरेंद्र सिंह, जिलाधिकारी

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