जेल में दूसरे बंदियों से नहीं मिल सकेगा मूंछ

Muzaffar nagar Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
मुजफ्फरनगर। माफिया सरगना सुशील मूंछ पर जेल में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। उसे दूसरे बंदियों से मिलने तक की इजाजत नहीं है।
शुक्रवार को सुशील मूंछ को जिला कारागार से एसीजेएम बुद्धि सागर मिश्रा की कोर्ट में लाया गया। अधिवक्ता हरजीत सिंह ने बताया कि गैंगवार की आशंका के चलते सुशील मूंछ की हिफाजत के लिए सीजेएम से विशेष सुरक्षा मांगी गई थी। जिनकी अनुमति मिलने के बाद ही उसको विशेष सुरक्षा के बीच अदालत लाया गया। उन्होंने बताया कि गुरुवार को वर्ष 2008 में रतनपुरी के कितास में हुई हत्या के मामले के एक वारंट पर सीजेएम हस्ताक्षर नहीं कर सके थे। इसी लिए मूंछ को कोर्ट में दोबारा पेश होना पड़ा। शुक्रवार को सीजेएम का प्रभार एसीजेएम के पास था, उनके हस्ताक्षर के बाद सुशील को वापस जेल में दाखिल कर दिया गया। माना जा रहा है कि आवश्यक कार्रवाई के बाद जेल प्रशासन जल्द ही मूंछ को पूर्वांचल की किसी जेल में शिफ्ट करेगा। जेलर मिजाजी लाल ने बताया कि जेल की तन्हाई बैरक में मूंछ के अलावा मेरठ से शिफ्ट हुए शातिर अपराधी प्रवीन शर्मा, शाहनवाज, जावेद और राजा को भी रखा गया है। फिलहाल जेल में 24 घंटे मूंछ पर कड़ी नजर रखने के साथ ही भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इसके अलावा किसी भी बंदी अथवा कैदी को उससे मिलने पर पूर्णत: पाबंदी है।

‘हैलो, मैं पहले वाली जगह मिलूंगा’
मुजफ्फरनगर। माफिया सरगना सुशील मूंछ तक पहुंचने के लिए एसटीएफ को तीन माह तक होमवर्क करना पड़ा। उसके फोन सर्विलांस पर लगाए गए, लेकिन कोडवर्ड में बात करने की वजह से उसका पता नहीं लग पा रहा था। काफी मशक्कत के बाद एसटीएफ ने एक व्यक्ति को खोज निकाला जो मूंछ के संपर्क में था। उस व्यक्ति ने मूंछ से मिलने के लिए फोन किया, जिसमें मूंछ ने जवाब दिया कि पहली वाली जगह पर आ जाना। बस इसी एक चूक ने मूंछ को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
एसटीएफ के एसपी अनंत देव ने शुक्रवार को इस सिलसिले में कई अहम जानकारियां दीं। उनका कहना है कि अगर मूंछ अब नहीं पकड़ा जाता तो फिर उसका फंदे में फंसना मुश्किल हो जाता। वह इसलिए कि वह जल्द किसी दूसरे शहर में अपना ठिकाना बदलने की तैयारी में था। मूंछ मोबाइल पर कम लैंडलाइन पर ज्यादा बात किया करता था। वह अपने ठिकाने पर कभी किसी को नहीं ले गया। आसपास के लोग उसे बिजनेसमैन के रूप में जानते थे। यहां तक कि उसके साथी बदन सिंह बद्दो और भूपेंद्र बाफर भी उसके ठिकाने से अनजान थे। इनसे पूछताछ में इतना साफ हुआ कि उनकी मूंछ से जो भी मुलाकात हुई, करनाल या दिल्ली में हुई। सर्विलांस की मदद से एसटीएफ ने मुजफ्फरनगर के उस शख्स को खोज निकाला जो मूंछ से लगातार बात करता था। खास बात ये थी कि जिस सिम से वह बात करता था, उस पर मूंछ के नंबर से अलावा किसी से बात नहीं हुई। प्रॉपर्टी के धंधे से जुड़े इस शख्स ने मूंछ को कॉल कर पूछा कि उसे मिलना है, कहां मिलोगे? इस पर मूंछ का जवाब था कि ‘पहली वाली जगह पर’। यानी मूंछ ने उस जगह का नाम नहीं लिया जहां मिलना था। मूंछ इस बात से अनजान था कि उसके मिलने के कई ठिकानों का राज एसटीएफ जान चुकी है। बस, माफिया सरगना यहीं गच्चा खा गया और एसटीएफ के शिकंजे में फंस गया।

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