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वेदवती-रावण संवाद तथा श्रवण लीला का मंचन

Muzaffar nagar Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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पुरकाजी 13 अक्तूबर
समाज सुधार समिति के तत्वाधान में आयोजित रामलीला में गत् रात्रि स्थानीय कलाकारों ने रावण वेदवती तथा श्रवण लीला का मंचन सुंदर ढ़ग से प्रस्तुत किया।
मंचन में दिखाया गया कि श्रवण कुमार अपने बूढ़े व अंधे मां-बाप को अपने कंधों पर यात्रा कराने के दौरान प्यास लगने पर जंगल में एक तालाब पर पानी लेने के लिए जाता है। जहां अयोध्या के राजा दशरथ शिकार खेलने के दौरान किसी जंगली जानवर के पानी पीने के वहम में श्रवण कुमार पर तीर चला बैठते है। तीर लगते के साथ ही श्रवण कुमार प्राण त्याग देता है। जिसे देखकर राजा दशरथ घबरा जाते है, तथा स्वयं पानी लेकर श्रवण कुमार के माता पिता के पास पानी लेकर जाते है। अपने पुत्र की इस तरह से मौत हो जाने पर दोनों दशरथ की आवाज पर श्रवण के बारे में पूछते है जो दशरथ द्वारा सारी बताने पर दोनों पानी पीने से इंकार कर दशरथ को पुत्र वियोग में प्राण त्यागने का श्राप देकर परलोक सिधार जाते है। मंचन के दौरान श्रवण कुमार के माता-पिता का विलाप देखकर दर्शकों की आंखें भर आई। श्रवण की भूमिका में वरूण भंडारी, दशरथ की सागर कोरी, रावण की लोकेश गोयल तथा वेदवती की वरूण ने निभाई। इस दौरान कमेटी के पदाधिकारी सुशील वर्मा, आंनद धीमान, श्रवण शर्मा, मनोज कर्णवाल, मोहन शर्मा, रामअवतार सिंघल, अंकित गोयल, वीशू शर्मा, रजत वर्मा, मणिकांत गोयल तथा सैकड़ों की संख्या में दर्शक मौजूद रहे।

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