हाईवे भूमि अधिग्रहण में बड़ा गोलमाल

Muzaffar nagar Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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मुजफ्फरनगर। हाईवे भूमि अधिग्रहण में बडे़ पैमाने पर गोलमाल हुआ है। अधिग्रहीत की गई भूमि की पैमाइश में जो तथ्य सामने आए हैं, उससे प्रशासनिक अधिकारी भी सकते में हैं। ज्यादातर मामले ऐसे हैं कि जमीन किसी और की है और मुआवजा किसी और ने ले लिया। इतना ही नहीं सीबीआई कोर्ट द्वारा कुर्क की गई भूमि का भी मुआवजा वसूल लिया गया है। इस भूमि का मालिक प्रदेश के चर्चित आयुर्वेद घोटाले का मुख्य आरोपी रहा है। यह खेल तो अब तक हुई तीन-चार गांवों की जांच-पड़ताल में उजागर हुआ है। सदर और खतौली में अधिग्रहीत की गई 32 गांवों की भूमि पर पैमाइश का काम चल रहा है।
दिल्ली-देहरादून हाईवे फोरलेन बनकर लगभग तैयार हो चुका है, लेकिन अधिग्रहीत भूमि की पैमाइश में जिस तरह के खुलासे हो रहे हैं, उससे अधिग्रहण कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। दरअसल, मुजफ्फरनगर जिले के 32 गांवाें की 321.6133 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया था। सलेमपुर गांव से अधिग्रहीत की गई भूमि में गोलमाल की पहली शिकायत आई थी। डीएम सुरेंद्र सिंह ने इस गांव की भूमि अधिग्रहण की जांच कराई तो गोलमाल के कई सनसनीखेज तथ्य सामने आए। डीएम ने सदर और खतौली तहसील की अधिग्रहीत की गई पूरी भूमि की स्थलीय पैमाइश कर जांच-पड़ताल के आदेश कर दिए। सदर क्षेत्र में तहसीलदार रजनीकांत पांडेय जांच-पड़ताल की कमान संभाले हुए हैं। जांच में पता चला कि एक ऐसे भूमि का भी अधिग्रहण किया गया है, जो सीबीआई कोर्ट द्वारा पहले ही कुर्क की जा चुकी है। गौरतलब है कि यह जमीन प्रदेश में एक दशक पहले हुए आयुर्वेद घोटाले के मुख्य आरोपी की है। गंभीर बात ये है कि उक्त भूमि का भी मुआवजा वसूल लिया गया। कई ऐसे मामले भी पाए गए, जो भूमि अधिग्रहीत की गई, वहां आज भी फसल खड़ी है, जबकि हाईवे का चौड़ीकरण का काम पूरा हो चुका है। कई भूमि के मुआवजे ऐसे लोगों ने वसूल लिए, जो जमीन दूसरों को बेच चुके हैं। दाखिल खारिज नहीं होने के कारण कागजों में उनके नाम चले आ रहे हैं।

*जांच में ये हुए खुलासे
*सीबीआई कोर्ट द्वारा कुर्क की गई भूमि का मुआवजा भी वसूला गया।
*ऐसी जमीन से भी मुआवजा वसूला गया, जो काफी पहले बेच चुके हैं।
*कागजों में जमीन अधिग्रहित कर दी, लेकिन मौके पर खड़ी है फसल।

जल्द सामने आएगी तस्वीर
अपर जिलाधिकारी वित्त राजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे गोलमाल की तस्वीर साफ हो पाएगी, लेकिन खतौली और सदर तहसील में कराई जा रही जांच में बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। उन्हाेंने बताया कि डीएम ने हाल में ही पैमाइश कर अधिग्रहीत भूमि की जांच कराने के आदेश दिए हैं, जिस पर काम चल रहा है।

10 गांवों का मुआवजा बाकी
जिले में अधिग्रहीत की गई 32 गांवों की भूमि का 86.96 करोड़ का मुआवजा वितरित किया जा चुका है, जबकि 15 गांवाें के किसानों का करीब 39 करोड़ 54 लाख रुपये बकाया चल रहा है। इनमें से पांच गांवों हुसैनपुर बोपाड़ा, खानपुर, नरा, जड़ौदा और शेरनगर के किसानों को तीन करोड़ 40 लाख रुपये के चेक प्रशासन द्वारा वितरित किए जा रहे हैं।

इन गांवाें की अधिग्रहीत हुई भूमि
जनपद के 32 गांव भैंगी, टबीटा, मुबारिकपुर, शहवाजपुर, तिगाई, सरधन, खतौली ग्रामीण, सठेडी, अजितपुर, रायपुर नंगली, भैंसी, शेरपुर, मुनव्वरपुर खुर्द, अकबरपुर, जहांगीरपुर, हुसैनपुर, बोपाड़ा, खानपुर, नरा, जड़ौदा, बेगराजपुर,संधावली, वहलना, शेरनगर, विलासपुर, मुस्तफाबाद, पचेंडा कलां, नसीरपुर, रथेड़ी, बागोवाली, बहेड़ी, रामपुर, सिसौना बीवीपुर की भूमि हाइवे के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित की गई है।

कुर्क संपत्ति होती है कोर्ट के अधीन
वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र शर्मा का कहना है कि कोर्ट द्वारा कुर्क की गई संपत्ति स्वत: ही कोर्ट के अधीन हो जाती है। ऐसे में यदि भूमि अधिग्रहीत हुई है तो नियमानुसार कोर्ट से परमीशन लेकर मुआवजा राशि भी कोर्ट में जमा करानी चाहिए। इस मामले में क्या प्रक्रिया अपनाई गई है, यह रिकार्ड देखने के बाद ही पता चलेगा।

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