‘आशाओं’ ने तोड़ी आस

Muzaffar nagar Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
मुजफ्फरनगर। ग्रामीणों तक स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को पहुंचने की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाने वाली ‘आशाओं’ के जिले में 526 पद रिक्त चल रहे हैं। यही नहीं तीन सौ से अधिक आशाएं निष्क्रिय चिह्नित की गई हैं। जननी शिशु सुरक्षा समेत अन्य योजनाओं का क्रियान्वयन भी खटाई में पड़ता दिख रहा है।
ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचाने के लिए वर्ष 2005 में आशाओं की भर्ती की गई थी। आशाओं का कार्य विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाना था, जिसके बदलें इन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। मुजफ्फरनगर में इस समय 1653 की अपेक्षा केवल 1127 आशाएं ही कार्यरत है। वर्ष 2005 के बाद भर्ती न किए जाने के चलते 526 पद रिक्त चल रहे हैं। फिलहाल कार्य कर रही आशाओं में तीन सौ से अधिक ऐसी हैं, जिन्होंने अभी तक कोई कार्य नहीं किया है। ऐसी निष्क्रिय आशाओं को स्वास्थ्य विभाग ने चिह्नित कर रखा है, लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती। कारण यह क्योंकि आशाओं का पद मानदेय के बजाए प्रोत्साहन राशि पर सृजित हैं। नुकसान यह हो रहा है कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाएं खटाई में पड़ रही है। जननी शिशु सुरक्षा योजना, संक्रामक रोगों की रोकथाम समेत अन्य योजनाएं जनपद के कई विकास खंडों में निष्क्रिय हैं। जिला समन्वयक पारुल कहती हैं कि जो आशाएं निष्क्रिय हैं उन्हें भी प्रोत्साहित करने के प्रयास हैं। रिक्त पदों की बाबत शासन को अवगत कराया गया है।

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