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इज्जत की खातिर प्यार की दुश्मन बनी पंचायतें

Muzaffar nagar Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
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शामली। समाज और इज्जत की खातिर पंचायतों के तुगलकी फरमान हमेशा विवादों में रहे हैं। बागपत के असारा गांव में पंचायत द्वारा सुनाए गए तुगलकी फरमान की जांच करने पहुंची पुलिस पर हमला भी हुआ। जिले में भी पंचायतें इस तरह के फैसले सुनाती आई हैं।
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एक दौर था जब पंचायतों का मतलब गांव, समाज और परिवारों के आपसी विवाद, मनमुटाव को खत्म कराना होता था। खुद पुलिस भी अनसुलझे विवादों को निपटाने के लिए पंचायतों की मदद लेती थी। मगर जैसे-जैसे समय बदला इन पंचायतों के निर्णय तुगलकी फरमानों में बदलते चले गए। हालात अब यह है कि इज्जत और समाज के नाम पर प्यार करने वालों की दुश्मन बन बैठी हैं।
शामली के बुजुर्गों को करीब 20 साल पहले खंदरावली गांव की वो घटना आज भी याद है, जब एक लड़की को लेकर गए युवक का भरी पंचायत में ही सिर कलम कर दिया गया था। इस घटना से पूरा यूपी दहल गया था। इसके बाद, तो ऐसे फरमानों का दौर सा शुरू हो गया। यदि एक ही गांव के युवक-युवती ने प्यार किया तो उनके परिवार वालों को पंचायतों में बुलाकर नसीहतें तक दी गई। पिछले ही दिनों एक ही खाप के दो गावों के प्रेमी युगल ने शादी रचानी चाही, जिसका कुछ लोगों ने विरोध किया। यहां तक कि उन्हें गांव में न रहने देने तक की चेतावनी दी गई। यह आरोप लेकर प्रेमी युगल एसपी आफिस पहुंचे, पुलिस ने सुरक्षा घेरे में उनकी शादी कराई।

शिकायत के अभाव में नहीं होती कार्रवाई
शामली। पंचायतों के निर्णय गैर कानूनी होते हैं, लेकिन इन फरमानों के खिलाफ लोग खुलकर सामने नहीं आते, पुलिस भी लिखित शिकायत के अभाव में कार्रवाई न करने को मजबूर रहती है और यह पुलिसिया रिकार्ड में भी नहीं चढ़ पाते है। यही वजह है कि इन पंचायतों के तुगलकी फरकान बदस्तूर जारी हैं। हालांकि जिले के विभिन्न खापों ने शादी में फिजुल खर्ची रोकने को कम बारातियों की शादी, दहेज लेनदेन बंद करने जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अच्छे निर्णय लेकर समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत किया है, लेकिन समाज के ठेकेदार कुछ दबंग आज भी अपने तुगलकी फरमान सुनाकर पंचायतों को बदनाम कर रहे हैं।

इनका होता है विरोध
- प्रेम करने वाले युगल एक गांव का होना।
- दोनों की जाति और गौत्र समान होना।
- छोटी जाति के युवक या युवती से शादी।
- युवक-युवतियों का खुलकर बात करना, मिलना-जुलना।
- युवक-युवती का रिश्तेदार होना।
- दूर की रिश्तेदारी में होना।

लोकतंत्र में सबको निर्णय लेने का अधिकार
शामली। वीवी कॉलेज के प्रधानाचार्य का कहना है कि हमारे देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है, इसमें हर किसी को अपनी मर्जी से निर्णय लेने के अधिकार हैं। किसी पर जबरन कोई निर्णय थोपना गलत है, लोगों को भी समाज और कानून के दायरे में काम करना चाहिए।
छात्र संजय कुमार, प्रदीप कुमार का कहना है कि जब देश का संविधान बालिग होने पर युवक-युवती को अपनी मर्जी के फैसले खुद लेने का अधिकार दे चुका है, तो फिर पंचायतें उनके फैसलों में दखल क्यों देती हैं।
प्रवीण कुमार कहते हैं कि पंचायतों का काम समस्याएं सुलझाना होता है। यदि इसी तरह तुगलकी फरमान देंगे, तो एक दिन लोग उनका ही सम्मान करना छोड़ देंगे।

सुनाई जाने वाली सजाएं
- युगलों का मुंह काला कर घुमाना, गधे पर बिठाना।
- पंचायत में जूते मारना, जुर्माना लगाना।
- प्रेमी-युगलों को गांव निकाला देना।
- परिजनाेें को गांव छोड़कर जाने का फरमान देना।
- पीडि़ता को मुआवजा दिलाकर मुंह बंद रखने की नसीहत देना।
- परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करना।

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