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स्वामी दिव्यानंद तीर्थ का निधन

Meerut Bureauमेरठ ब्यूरो Updated Sat, 20 Apr 2019 11:51 PM IST
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स्वामी दिव्यानंद तीर्थ का निधन
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शुकतीर्थ (मोरना)/मुजफ्फरनगर)। भानपुरा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने दिल्ली के एम्स में शनिवार को जीवन की अंतिम सांस ली। शुकदेव मुनि की तपोभूमि में उन्होंने वेद-शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया था। पौराणिक शुकतीर्थ की तपोभूमि में जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ को आध्यात्म, धर्म और सनातन संस्कृति का ज्ञान मार्ग मिला था। वीतराग स्वामी कल्याणदेव की निष्काम सेवा में उन्होंने जीवन के दर्शन की खोज की।
भानपुरा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने दिल्ली के एम्स में शनिवार को जीवन की अंतिम सांस ली। शुकदेव मुनि की तपोभूमि में उन्होंने वेद-शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया था। दंडी आश्रम के संस्थापक एवं भागवत मर्मज्ञ स्वामी विष्णुआश्रम महाराज के सानिध्य में उन्होंने सनातन संस्कृति , धर्म और आध्यात्म का गहनता से अध्ययन किया। कई साल शुकतीर्थ में बिताए और वर्ष 1984 में चित्रकूट के स्वामी हरिश्वरानंद तीर्थ से संन्यास की दीक्षा ली। दंडी आश्रम में प्रवास के दौरान शिक्षा ऋषि वीतराग स्वामी कल्याणदेव महाराज के नि:स्वार्थ कर्मयोगी जीवन से त्याग, सेवा और सादगी की प्रेरणा मिली। स्वामी विष्णुआश्रम के शिष्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ को वीतराग संत का आत्मिक स्नेह मिला। उन्होंने शुकदेव आश्रम, दंडी आश्रम और हनुमंतधाम में अनेक भागवत और राम कथा सत्संग सप्ताह किए। वर्ष 1989 में स्वामी जी ने मध्य प्रदेश के उज्जैन संभाग की भानपुरा पीठ के 11वे पीठाधीश्वर का दायित्व संभाला था। उनसे पहले भारत माता मंदिर हरिद्वार के स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज इस पीठ पर विराजमान थे। उन्हें शुकतीर्थ से गहरा लगाव था। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज बताते हैं कि गुरुदेव वीतराग स्वामी कल्याणदेव का आत्मिक स्नेह स्वामी दिव्यानंद तीर्थ को मिला। मोदीनगर में प्रवास के दौरान वह कई बार शिक्षा ऋषि से मिले। उनकी स्मृतियां कभी नहीं भूलेगी। हनुमंतधाम के अधिष्ठाता एवं महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज कहते हैं कि हनुमंत जन्मोत्सव में उनकी गरिमामयी उपस्थिति रहती थी। शुकतीर्थ में आमंत्रण का आग्रह कभी नहीं टालते थे। दंडी आश्रम के संचालक स्वामी गुरुदत्त महाराज का कहना है कि स्वामी दिव्यानंद तीर्थ परोपकार को संतों का आभूषण कहते थे। ज्ञानमार्गी पुरोधा संत स्वामी विष्णु आश्रम महाराज की भगवत भक्ति के प्रवाह को अग्रसारित करने में उनका जीवन समर्पित रहा।

दंडी आश्रम में सुनाई थी भागवत कथा
मोरना। दंडी आश्रम में स्वामी विष्णु आश्रम महाराज के स्मृति समारोह में गत वर्ष स्वामी दिव्यानंद तीर्थ अंतिम बार शुकतीर्थ पधारे थे। मनोहर शर्मा बताते हैं कि मार्च 2018 में दंडी आश्रम में उनकी भागवत कथा हुई थी। दंडी स्वामी महेश्वराश्रम महाराज ने बताया कि अपने गुरु के प्रति श्रद्धा और भक्ति उन्हें यदा-कदा शुकतीर्थ खींच लाती थी। सनातन धर्म सभा की ओर से उन्होंने कई देशों की यात्रा की और धर्म की पताका फहरायी।

अंतिम संस्कार में शामिल हुए संत और महात्मा
मोरना। अनंत विभूषित भानपुरा पीठ शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ के ब्रह्मलीन होने से शुकतीर्थ में शोक की लहर है। उनके अंतिम दर्शन को बड़ी संख्या में शुकतीर्थ के संत, महात्मा ब्रजघाट पहुंचे और विधि विधान से हुई जल समाधि के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। दंडी आश्रम संचालक स्वामी गुरुदत्त महाराज, हनुमंतधाम के महा मंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज, ब्रह्म विद्यापीठ के संस्थापक दंडी स्वामी महेश्वराश्रम महाराज, महा मंडलेश्वर स्वामी विनय स्वरूपानंद महाराज, स्वामी गीतानंद गिरि महाराज , मनोहर शर्मा आदि ने ब्रह्मलीन संत की जल समाधि यात्रा में भाग लिया। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने स्वामी दिव्यानंद तीर्थ के गोलोकगमन पर शोक व्यक्त किया है। कहा कि उनका देहावसान संत समाज और राष्ट्र की अपूरणीय क्षति है।

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