समाज के लिए मिसाल बन रहे मंगलामुखी

Meerut Bureauमेरठ ब्यूरो Updated Tue, 27 Nov 2018 01:20 AM IST
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समाज के लिए मिसाल बन रहे मंगलामुखी
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मुजफ्फरनगर। मंगलामुखी सामाजिक कार्यों में आगे आकर समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रहे हैं। जयपुर का गुरु मुन्नी बाई दो अनाथ बच्चियों को अलग से हॉस्टल में रखकर उन्हें शिक्षित कर रहा है, तो दिल्ली का गुरु मनीषा एक साल में बीस लड़कियों की शादी कराता हैं। गुरु नाजिमा कहते हैं कि उनके यहां आय का दस प्रतिशत दान के लिए निकाला जाता है, जिससे जरूरतमंद की मदद की जाती है।
अखिल भारतीय किन्नर महासभा की ओर से यहां चल रहे महासम्मेलन में देश के कोने-कोने से मंगलामुखी आए हैं। मंगलामुखी के सम्मेलन में भाग लेने आए कुछ नामचीन शहरों के गुरुओं से बात हुई तो समाज की चिंता उनके मन और अंतरहृदय में साफ दिखाई दी। वह कहते हैं कि हमने भी मॉ के पेट से जन्म लिया है। समाज में हमारे प्रति भले ही अभी तक सोच न बदली हो, लेकिन समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए वह हर समय तैयार रहते हैं। जयपुर के आदर्शनगर के खरबूजा मंदिर में रहने वाले गुरु मुन्नी बाई कहते हैं कि उनके घर से कुछ दूरी पर पांच साल की एक लड़की को कोई छोड़ गया, जब किसी ने हिम्मत नहीं जुटाई, तो हमने उसे अपना लिया। इसी तरह सात साल की एक अनाथ बच्ची को भी गोद लिया। इन दोनों की पढ़ाई वह अपने खर्च पर करा रहे हैं। दोनों को हॉस्टल में रखा गया है। हमारे समाज में रहकर इसका असर न हो जाए, इसलिए उनके लालन-पालन की अलग व्यवस्था की गई। दोनों की पढ़ाई पूरी कराकर उन्हें पैरों पर खड़ा किया जाएगा। यह प्रयास करेंगे कि उन्हें किसी के आगे हाथ न पसारना पड़े। दिल्ली से आए गुरु मनीषा कहते हैं कि मानव में जिस तरह की संवेदना होती है, ऐसी ही हमारे अंदर भी है। हम मान सम्मान से अपना कार्य करते हुए दूसरों की मदद करना चाहते हैं। दिल्ली में वे हर साल अपनी ओर से बीस गरीब और बेसहारा लड़कियों की शादी कराते है। बीच में कोई मदद के लिए आ जाता है तो उसकी मदद भी करते हैं।
महासम्मेलन के आयोजक गुरु नाजिमा कहते हैं कि हम लोग जो पैसा बधाई से एकत्र करते हैं, उसमें दस प्रतिशत लोगों की इमदाद का अलग से निकालते हैं। हम लोग रोज बीसों घर जाते हैं, कुछ परिवारों में ऐसी समस्या देखने को मिल जाती है कि हमारा दिल पसीज जाता है। हम उनकी आर्थिक मदद करते हैं। हम किसी को भूखा नहीं देख सकते हैं। वे कहते है कि हर साल गरीब लड़कियों की शादी में वह सहयोग करते है।
शिक्षित हो, रोजगार करें
मुजफ्फरनगर। मंगलामुखी गुरु मनीषा और मुन्नी बाई कहते हैं कि जब किसी के घर हमारे जैसा बच्चा होता है तो वह उसे हमें देने का प्रयास करता है। हम उन्हें यह कहते है कि इसकी अपने दूसरे बच्चों की तरह परवरिश करें। इन्हें पढ़ा-लिखाकर पैरों पर खड़ा करो। जब कोई नहीं मानता और वह उन्हें सौंपता है तो अब वह भी इन बच्चों की पढ़ाई करा रहे हैं। हम नहीं चाहते की भविष्य के मंगलामुखी किसी के आगे हाथ फैलाएं। युरोपियन कंट्री की तरह यहां भी भेदभाव खत्म होना चाहिए। मुन्नी बाई कहते ंहै कि उन्होंने ऐसे ही दो बच्चों को ग्रेजुएट कराया है, उनसे कहा है कि वह चाहे तो नौकरी कर सकते हैं।
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हमें चाहिए इज्जत और अपनापन
मुजफ्फरनगर। अखिल भारतीय किन्नर महासम्मेलन में देश में अमन चैन की दुआ होती है। जो बेऔलाद हैं, उनके बच्चे हो जाए, इसकी दुआ की जाती है। फौजियों की रक्षा, देश में भाईचारे की दुआ होती है। हम सबकुछ समाज के लिए ही सोचते हैं। सम्मेलन में आए मंगलामुखी कहते है कि समाज से हमें चाहिए प्यार, इज्जत और अपनापन।
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