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चुनावी चक्रव्यूह रचने में जुटे मुलायम

अखिलेश वाजपेयी/लखनऊ Updated Sat, 09 Feb 2013 01:33 PM IST
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mulayam singh yadav preparing for lok sabha election

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मंत्रिपरिषद का विस्तार करते हुए समाजवादी पार्टी नेतृत्व ने बेहतर और ठोस चुनावी व्यूहरचना का परिचय दिया है। लोकसभा चुनाव में वह हर जातीय और क्षेत्रीय समीकरण का जबरदस्त ख्याल रख रही है। एक तरफ उसने अपने पुराने वोट बैंक को बनाए रखने की कोशिश की है तो वहीं वह कुछ क्षेत्रों में अपनी कमजोरी को पहचानते हुए नए मोहरे बिछाने के ख्याल से नई मंत्रिपरिषद की रूपरेखा तैयार की है।
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साफ है कि पार्टी का लक्ष्य सिर्फ सीटें जीतना भर नहीं बल्कि ऐसी स्थिति को बना देना है जिसमें यूपी की सियासी बयार उनके इशारे पर बहे। विरोधियों की वह जबरदस्त घेराबंदी कर दें। खासतौर से कांग्रेस, कम से कम उत्तर प्रदेश के अखाड़े में उनसे किसी तरह का पंगा लेने से पहले सौ-सौ बार सोचें और बसपा से दोस्ती निभाने की मनमानी न कर सकें।


जातियों को सपा से जोड़ने की गणित
जातियों के आंकड़ों पर ध्यान दें तो मथुरा से मेरठ तक की पट्टी में आने वाली लोकसभा की सीटों आगरा, फतेहपुरसीकरी, एटा, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बदायूं, आंवला, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर में यादव व मुसलमान के अलावा गुर्जर, जाट, लोध, कश्यप, बिंद, निषाद बिरादरी भी फैली हुई है। कुल आबादी में इनकी भागीदारी लगभग 12 प्रतिशत से अधिक है। यह जातियां वह हैं जो दूसरों के साथ जुड़कर उम्मीदवारों के भाग्य के फैसले में अहम भूमिका निभाती हैं।

आगरा से अकबरपुर (कानपुर देहात) तक पट्टी भी यादव व मुसलमान की आबादी के साथ-साथ पाल (गड़रिया) व शाक्य (मौर्य, कुशवाहा, काछी) व लोध बिरादरी की मुख्य भूमिका वाली है। खासतौर से फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज व अकबरपुर (कानपुर देहात) की सीटें। आगरा से अकबरपुर (कानपुर देहात) के बीच स्थित सीटों में लगभग हर सीट पर पाल बिरादरी का 70 हजार से एक लाख वोट है तो मथुरा से मेरठ के बीच स्थिति सीटों पर गुर्जर, जाट, लोध, कश्यप, मल्लाह व बिंद में सभी जातियों के औसतन डेढ़ लाख से लेकर तीन लाख तक वोटों का आंकड़ा है।

किलेबंदी अपनी व अपनों के लिए भी
इन जातियों के समीकरण वाली सीटों में मैनपुरी से मुलायम सिंह खुद सांसद हैं। कन्नौज से पहले उनके पुत्र इस समय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सांसद थे। अब उनकी पुत्रवधू अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव सांसद हैं। बदायूं से मुलायम के भतीजे धर्मेन्द्र यादव सांसद हैं तो फिरोजाबाद से सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव को प्रत्याशी घोषित किया गया है।

समझा जा सकता है कि मंत्रिपरिषद विस्तार में विजय बहादुर पाल, आलोक कुमार शाक्य, राममूर्ति वर्मा (लोध) को न सिर्फ अपनी सीटों की सुरक्षित घेरेबंदी के लिए जगह दी गई है बल्कि लोकसभा चुनाव में इसी जातीय वोट को सपा के खाते में जोड़ने की गणित भी इसके पीछे है।

अक्षय की राह आसान व सीटें बढ़ाने का इंतजाम
ध्यान रखना होगा कि मुलायम के खिलाफ मैनपुरी से दूसरे दल ज्यादातर शाक्यों को ही उम्मीदवार बनाते रहे हैं। मुलायम ने अब एक शाक्य को ही मंत्रिपरिषद में जगह देकर विरोधियों की रणनीति को कुंद करने की कोशिश की है। हालांकि मुलायम के संसदीय क्षेत्र में विधानसभा का जसवंतनगर क्षेत्र शामिल होने से उन्हें कोई संकट नहीं है।

बावजूद इसके उन्होंने भविष्य की गणित को ध्यान में रखते हुए शाक्य, पाल व लोध को मंत्री पद दिलाया है। यह करके उन्होंने न सिर्फ अपनी सीट की किलेबंदी कर डाली है बल्कि केंद्र में ताकतवर भूमिका निभाने के लिए भी जमीन बनाने की कोशिश की है। साथ ही इस पट्टी की लगभग दो दर्जन सीटों पर पार्टी के आंकड़े को बढ़ाने का भी इंतजाम किया है। इस समय इस पट्टी में सपा के पांच ही सांसद हैं। इनमें तीन मुलायम सिंह के परिवार के ही हैं। शेष में एक इटावा उनकी गृहसीट तो दूसरी शाहजहांपुर है।

जाहिर है कि सीटों का आंकड़ा बढा़ने के साथ मुलायम फिरोजाबाद से चुनावी सियासत में प्रवेश कर रहे अपन भतीजे अक्षय की राह भी आसान बनाना चाहते हैं। इसकी भी वजह है। फिरोजाबाद सीट मुलायम परिवार के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है। कारण, पिछले चुनाव में उनकी पुत्रवधू डिंपल को यहां पराजय का सामना करना पड़ा था। इसीलिए उन्होंने आगरा से एक  ठाकुर व एक गुर्जर मंत्री बनाकर और अन्य जातियों के समीकरण बैठाकर अक्षय को लोकसभा पहुंचाने का इंतजाम किया है।

कांग्रेस पर दबाव
अमेठी से विधायक गायत्री प्रजापति हों या रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक मनोज पाण्डेय। इनको भी मंत्री बनाने के पीछे काफी नापतोल की गणित है। प्रजापति (कुम्हार) बिरादरी के किसी व्यक्ति को मंत्रिमंडल में शामिल करने के पीछे पूरे प्रदेश में फैली लगभग 4 प्रतिशत कुम्हारों की आबादी को सपा के साथ जोड़ना है।

रायबरेली से मनोज पांडेय को लालबत्ती का पुरस्कार विधानसभा चुनाव से पहले जगह-जगह ब्राह्मण सम्मेलनों को करने के लिए तो दिया ही गया है। साथ ही रायबरेली के ब्राह्मण फैक्टर को भी ध्यान में रखकर किया गया है। पाण्डेय के बहाने मुलायम ने रायबरेली लोकसभा की पांच में चार सीटें सपा के खाते में देने के लिए जहां वहां के लोगों में भविष्य के लिए आस पैदा करने की कोशिश की है तो पाण्डेय व प्रजापति के जरिये कांग्रेस को यह समझाने की कोशिश भी कि सपा से चुनाव में कांग्रेस ने ज्यादा सियासत की या बसपा के बहाने कोई और राह पकड़ी तो सपा सोनिया व राहुल के घर में ऐसी समीकरण फिट करेगी कि दोनों उसमें फंस जाएं।  

यही गणित गोंडा से तीन ठाकुरों की लालबत्ती देने के पीछे भी है। गोंडा में मुलायम के कभी दोस्त और अब दुश्मन बेनी प्रसाद वर्मा को वहीं बांधे रखने के लिए वहां के इतनी तवज्जो दी गई है। मुलायम की कोशिश है कि बेनी गोंडा में इस तरह घिर जाएं, जिससे दूसरी जगह जाकर पिछड़ों के वोटों में सेंधमारी न कर सकें। पूर्वाचंल के गाजीपुर से पहले ओमप्रकाश सिंह को कैबिनेट मंत्री और अब विजय मिश्र को स्वतंत्रप्रभार राज्यमंत्री बनाकर सपा मुखिया ने इस इलाके में भी यादवों व मुसलमानों के साथ ब्राह्मण व ठाकुरों का समीकरण बैठाकर चुनाव के लिए वोटों का इंतजाम करने की कोशिश की है।

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