रामपुर-कांठ रोड पर शहर तो बढ़ा, सरकारी सुविधाएं नहीं

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 03 Dec 2021 12:42 AM IST
The city grew on Rampur-Kanth road, no government facilities
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मुरादाबाद। कहानी एक जैसी है हमारी भी तुम्हारी भी, भंवर में नाव अब भी है हमारी भी, तुम्हारी भी बदलनी चाहिए, जितनी भले उतनी नहीं बदली, मगर तस्वीर बदली है हमारी भी तुम्हारी भी। पूर्वांचल के कवि राजगोपाल सिंह की ये पंक्तियाँ मौजूदा समय में मुरादाबाद शहर के लिए लगभग सटीक बैठती हैं। शहर रामपुर रोड और कांठ रोड पर तेजी के साथ बढ़ा है। कांठ रोड पर हालांकि विकास भी कुछ अधिक हुआ है, लेकिन अगर समस्याओं और खास कर सरकारी चिकित्सा, शिक्षा व अन्य सुविधाओं की बात करें, तो रामपुर रोड पर बनी एकता विहार कॉलोनी और काठ रोड पर बनी प्रेमनगर कॉलोनी की स्थिति में कोई खास फर्क नहीं कहा जा सकता।
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शहर बढ़ा है, तो सुविधाओं के साथ यहां के बाशिंदों की अपेक्षाएं भी बढ़ीं हैं। लोकोशेड पुल चालू हो जाने से दिल्ली रोड पर अक्सर लगने वाले जाम से शहर के लोगों को काफी हद तक मुक्तिमिली है और सोनकपुर ओवरब्रिज चालू हो जाने के बाद इस संबंध में और भी सुधार होने की उम्मीद शहर के लोगों को है। करीब दो दशक पहले रामपुर रोड पर बसी एकता विहार कॉलोनी में रहने वाले लोग अभी भी कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। लंबे समय तक इस इलाके में रहने वाले लोग रेलवे लाइन क्रासिंग पर ओवरब्रिज न होने के कारण लगने वाले जाम की परेशानी झेलते रहे, जैसे-जैसे रेलवे लाइन पर फ्लाईओवर बना तो अब रामपुर दोराहा से जीरो प्वाइंट तक खराब सड़क की समस्या सालों से झेल रहे हैं।

स्वास्थ्य, शिक्षा और जल निकासी की दिक्कत
बीस साल पहले जब एमडीए ने एकता विहार कॉलोनी बसाई थी, तब यहां बहुत कम लोग रहते थे। अब आबादी बढ़ी है, लेकिन कॉलोनी की दशा पहले से और अधिक खराब हुई है। दो दशक पहले निर्मित नाले, नालियों के चोक रहने से जलनिकासी की समस्या बनी रहती है। इससे मकानों में सीलन की समस्या रहती है। सड़कें उखड़ी हैं। उससे धूल का गुबार उठता रहता है। सरकारी चिकित्सा सुविधा का लाभ उठाने के लिए लोगों को दस-बारह किमी दूर सिविल लाइन जाना पड़ता है। तीन किमी दूर ताजपुर में जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है वहां डाक्टर नहीं बैठते। सरकारी स्कूल भी आसपास के गांवों में ही हैं।
फिरोज खान, एकता विहार
लगता ही नहीं शहर में रहते हैं
एकता विहार कॉलोनी कहने को तो शहर की पॉश कालोनियों में शुमार है, लेकिन सुविधाएं वहां गांव से भी बदतर हैं। एक डाकखाना तक वहां नहीं है। इसके लिए करीब तीन किमी दूर पास के एक गांव में लोगों को जाना पड़ता है अथवा करीब दस किमी दूर शहर में। सबसे अधिक दशा सड़क की खराब है। सभी अधिकारियों की जानकारी में भी है, लेकिन समस्या का समाधान अभी तक नहीं हो सका है। 15 नवंबर तक सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के सरकारी आदेश के बाद लोगों में कुछ उम्मीद जगी थी। इसके बाद भी सड़कों की दशा में सुधार नहीं हो सका है।
अब्दुल रहमान, एकता विहार
कांठ रोड: सरकारी अस्पताल की जरूरत
काँठ रोड पर शहर ने काफी विस्तार किया है। लेकिन अनुपातिक रूप से सुविधाओं का विस्तार उतना नहीं हो सका। चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में निजी संस्थान तो प्रचुर मात्रा में स्थापित हैं, किन्तु सरकारी संस्थान नहीं हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को संकट का सामना करना पड़ता है। कांठ रोड पर लाखों की संख्या में लोग रहते हैं, इसलिए यहां एक बड़े सरकारी अस्पताल और विद्यालय की जरूरत है। इसके अलावा हरथला में लगातार रहने वाले जाम से मुक्ति के लिए फ्लाईओवर की भी जरूरत है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को इस दिशा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करना चाहिए।
- योगेंद्र वर्मा व्योम, साहित्यकार

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