चुनावी रंजिश से काजीपुरा में बवाल, फायरिंग

Moradabad Updated Mon, 28 Jan 2013 05:30 AM IST
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मुरादाबाद। निकाय चुनाव की रंजिश काजीपुरा में जुलूस ए मोहम्मदी के अगले दिन निकाली गई। रात गांव में जलसे के दौरान हुई कहासुनी ने सुबह हिंसक रूप ले लिया। गांव में पार्षद और उनके समर्थकों का दूसरे पक्ष से खूनी संघर्ष हुआ। पथराव और कई राउंड फायरिंग से भगदड़ मच गई। दोनों पक्षों के पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने पार्षद को हिरासत में लेकर बाकी की तलाश शुरू कर दी है। एहतियातन फोर्स तैनात कर दी गई है।
सिविल लाइंस के वार्ड 15 काजीपुरा में बारावफात की रात जलसे का आयोजन किया गया था। देर रात चाय पीने, पिलाने को लेकर पार्षद सईद अहमद के समर्थकों की निकाय चुनाव में प्रत्याशी रहे अशरफ अली और उनके समर्थकों से नोकझोंक हो गई। गांव के मोअज्जिज लोगों ने रात में किसी प्रकार दोनों पक्षों को शांत करा दिया। लेकिन अगले दिन गणतंत्र दिवस की सुबह फिर दोनों पक्ष आमने सामने आ गए। अशरफ के भाई शौकत की सईद के भतीजे नसीर से हाथापाई हुई और देखते ही देखते दोनों पक्षों में झड़प होने लगी।

इसके बाद दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर जमकर पथराव किया। बीच में फायरिंग भी हुई। छर्रे लगने से तीन लोग घायल हुए। पार्षद सईद, उनका भतीजा जरीस मलिक घायल हुए तो दूसरे पक्ष से शौकत, अशरफ अली, हाजी लल्ला आदि को चोट आई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और किसी प्रकार दोनों को शांत किया। पुलिस ने तत्काल पार्षद सईद को हिरासत में भी ले लिया। इसके बाद नसीर की ओर से शौकत, अशरफ, शमशुद्दीन, अमीर हुसैन, मुर्तजा, मेहराजुद्दीन, साहिबे आलम, मो. अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। उधर, शौकत ने भी सईद पार्षद, वहीद, शरीफ, जरीस, फरीद, रहीश, मुकीम, मतीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।
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जलसे में बिगड़ी बात, एक दूसरे को दी धमकी
मोहम्मद साहब की याद में जलसे का आयोजन हो रहा था और उधर, गांव में आपसी गुटबाजी को लेकर तनातनी हो रही थी। ग्रामीणों की मानें तो जलसे का आयोजन सामूहिक रूप से था। लेकिन किसी बात पर दोनों पक्षों के लोगों में कहासुनी होने लगी। बताया जा रहा है कि दोनों ने सुबह एक दूसरे को देख लेने की धमकी दी थी। इससे लोगों को पहले से ही घटना का अंदेशा था।
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चुनावी रंजिश में पहले भी हुआ था विवाद
निकाय चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद सईद काजीपुरा के पार्षद बने। बताया जा रहा है कि इसके बाद से दोनों पक्षों में तनातनी चल रही थी। सईद और अशरफ चुनाव के दौरान ही एक दूसरे के विरोधी बने। इससे पहले बिरादरी के नाते दोनों में अच्छी दोस्ती थी।

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