डीआईजी ने सुन ली होती तो बच सकती थी जान

Moradabad Updated Fri, 21 Dec 2012 05:32 AM IST
मुरादाबाद। डीआईजी ने अगर घर वालों की पुकार सुन ली होती तो शायद टैक्सी चालक की जान बचाई जा सकती थी। दो दिनों तक परिजन और ट्रैवेल एजेंसी संचालक डीआईजी की चौखट पर नाक रगड़ते रहे लेकिन उन्होंने मिलने से भी इनकार कर दिया। घंटों इंतजार के बाद जवाब मिला कि डीआईजी छुट्टी पर हैं मिल नहीं सकते। गुरुवार को राजीव की लाश मिलने के बाद परिजनों में गुस्सा है। उनका कहना है कि मुद्दे को शासन स्तर तक पहुंचाएंगे। डीआईजी की लापरवाही से उनके अपने ने जान गंवा दी।
तेरह दिसंबर को राजीव का पता न लगने पर उसके परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। पता लगा कि संभल में इनोवा कार बरामद हो गई है, लेकिन राजीव उसमें नहीं है। इसके बाद परिजन अपहरण की आशंका जताने लगे। संभल पुलिस ने सुनवाई नहीं की तो पंद्रह तारीख को डीआईजी से मिलने गए, लेकिन उनके पीआरओ ने टरका दिया। 16 तारीख को परिजन फिर पहुंचे तो इस बार संडे अवकाश कहकर परिजनों को वापस भेज दिया। इसके बाद परिजन संभल कोतवाली पहुंचे और हंगामा करने लगे। तब कहीं जाकर पुलिस ने रिपोर्ट लिखने की खानापूर्ति की। राजीव को बरामद करने के लिए कोई प्रयास शुरू नहीं किया।
मामले में डीआईजी शैलेंद्र प्रताप सिंह से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन नहीं उठा। उधर, राजीव का शव मिलने के बाद परिजन पुलिस के खिलाफ आक्रोश जता रहे हैं। मृतक के भाई संजीव ने कहा कि पुलिस तुरंत कार्रवाई करती तो भाई की जान बच सकती थी। ट्रैवल्स एजेंसी संचालक अशोक विश्नोई ने भी पुलिस की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
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इनोवा में थे सशस्त्र बदमाश!
-सियासी दबाव में छोड़ दिया गया था
-इलाके में गूंज रही इस बात की चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। इनोवा कार संभल में बरामद होने से पहले पुलिस ने उसमें कुछ सशस्त्र बदमाशों को देखा था। कार में राजीव भी मौजूद था। बताया जा रहा है कि चौधरी सराय चौकी के एक कांस्टेबिल ने उन्हें रोका और फिर छोड़ दिया था। इससे इनोवा में मौजूद लोगों के काफी दबंग होने का अंदाजा लगाया जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो चौकी के कांस्टेबिल ने इनोवा में सशस्त्र लोगों को देखकर उनसे कोई पूछताछ भी नहीं की। कुछ देर के लिए उसने कार रोकी थी। लेकिन बाद में किसी सियासी दबाव में सभी को जाने दिया गया। मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को नहीं दी गई। परिजनों ने इस बात को संभल कोतवाली प्रभारी से बताया था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। यही नहीं, उस कांस्टेबिल को बुलाकर पूछताछ करने की भी जहमत नहीं उठाई गई। बल्कि पुलिस पूरे मामले में लीपापोती की कोशिश करती रही। पहले तो रिपोर्ट दर्ज नहीं की, उस पर मामले को गुमशुदगी का बताकर चालक के खुद ही लौट आने का इंतजार करती रही।
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सर्विलांस से भी नहीं लगा सुराग
मुरादाबाद। घटना में पुलिस की लापरवाही देखकर राजीव के परिजनों ने अपने संसाधनों और जानकारों की मदद से उसकी मोबाइल की लोकेशन और काल डिटेल भी निकलवाई थी। इससे पता लगा कि राजीव संभल में ही कहीं मौजूद है। परिजनों ने इस काल डिटेल की फोटोकापी भी पुलिस को दी, लेकिन पुलिस चुपचाप बैठे रही। अपने सर्विलांस सिस्टम को भी एक्टिव करने की कोशिश नहीं की। ताकि बाद में मोबाइल आन होने पर राजीव की लोकेशन पता लगाई जा सके।
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दो जिलों के चार थानों की सीमा पर मिला शव
संभल। अपराधी भी पुलिस की सीमा विवाद को बखूबी समझ चुके हैं। राजीव की हत्या करने के बाद उन्होंने उसके शव को जिस स्थान पर डाला, वहां संभल व अमरोहा जिलों के चार थानों का बार्डर है।
संभल-अनूपशहर मार्ग पर मुबारकपुर संपर्क मार्ग पर एक पुलिया के नीचे बीच वाले पाइप पर राजीव उर्फ पिंकी का शव सीधा रखकर छोड़ दिया गया। यहां हयातनगर, आदमपुर, धनारी, रजपुरा चार थानों का बार्डर है। माना जा रहा है कि बदमाशों ने ऐसा मामले को थानों की सीमा विवाद में फंसाने के लिए किया। हालांकि बाद में अधिकारियों ने शव रजपुरा थाने की सीमा में होने की बात कही। थानाध्यक्ष रजपुरा ने बताया कि शरीर पर कोई चोट का निशान नजर नहीं आ रहा।
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