लोकोशेड पर अफसरों की ‘शर्मनाक’ हार

Moradabad Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
मुरादाबाद। शहर के लिए लोकोशेड पुल विकास के रास्ते में सबसे बड़ी हार है। नासूर बनता जा रहा यहां का जाम लोगों को डराने लगा है। घर से निकलते हैं, लेकिन खौफ यह रहता है कि कहीं जाम में न फंस जाएं। क्या अफसर..क्या जनप्रतिनिधि सभी के एजेंडे में ओवरब्रिज का चौड़ीकरण या नया निर्माण शामिल है फिर भी आठ साल बीत गए लेकिन पुल की कहानी कल जहां थी वहीं आज भी है।
लाइनपार की लाखों की आबादी का मुख्य मार्ग लोकोशेड ओवरब्रिज से होकर गुजरता है। दिल्ली रोड तो चौड़ा होता गया लेकिन उसपर बना पुल चौड़ा नहीं हुआ। असर यह हुआ कि सैकड़ों की संख्या में वाहन दोनों तरफ से आते हैं लेकिन पुल पतला होने की वजह से जाम में फंस जाते हैं। प्रशासन ने इस पुल के चौड़ीकरण को लेकर सैकड़ों मीटिंग कर ली होगी...हर चुनाव में नेताओं का मुख्य वादा पुल का चौड़ीकरण ही होता है। बाहर से आने वाले दिग्गज नेताओं के सामने भी इस पुल के चौड़ीकरण का रोना ही लोग रोते हैं लेकिन यह पुल चौड़ा नहीं हुआ। विकास की तेज रफ्तार शहर में चली लेकिन यहीं आकर ठहर गई। जिस दिल्ली रोड पर दो विश्वविद्यालय खुल गए, दर्जनों शिक्षण संस्थान नए बने...कई कालोनियां विकसित हो गईं वहां की एक बड़ी समस्या को खत्म कराने में सभी हारे हुए दिख रहे हैं। तभी तो आठ साल में जिस शहर में कई पुल बन गए वहां सबसे विकराल समस्या बना लोकोशेड पुल का हल नहीं ढूंढा जा सका।

लाखों रुपये डीपीआर पर खर्च
अबतक इस पुल को लेकर मीटिंग और डीपीआर पर लाखों रुपये खर्च हो गए हैं लेकिन प्रशासन ने शिद्दत से मुद्दा नहीं बनाया। रेलवे के अफसरों ने इंकार कर दिया था उसके बाद यहां चौड़ीकरण का रास्ता ढूंढने की कोशिश तक नहीं की गई। कई पुराने इंजीनियरों ने इस पुल के चौड़ीकरण की गुंजाइश तलाशी भी लेकिन कोई पहल करे तो बात आगे बढ़े।

शासन स्तर पर फाइल पहुंची ही नहीं
जिलाधिकारी संजय कुमार ने जब कार्यभार संभाला तो इस पुल के संकट को खुद महसूस किया। फाइल की तलाश हुई तो पता चला कि यह मुद्दा तो शासन में कभी ठीक से रखा ही नहीं गया था। बाद में उन्होंने कमेटी बनाई है लेकिन इस बात को भी चार माह से ज्यादा बीत चुके हैं।

साइडों के चौड़ीकरण की बात भी हवाई
सोचा गया था कि पुल के दोनों तरफ मुहाने पर सड़क को और चौड़ा कर दिया जाएगा ताकि कुछ जाम कम हो सके लेकिन यह योजना सिर्फ प्रस्ताव तक ही सीमित रह गई। अगर इसपर अमल कर लिया जाए तो कुछ वाहन आमने सामने आने के बजाए किनारे से निकल जाएंगे।

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गनीमत रही रविवार का दिन था
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। ये तो गनीमत रही कि रिक्शे-तांगे वालों ने रविवार को लोकोशेड पुल पर जाम लगाया। यदि ये आंदोलन किसी और दिन हुआ होता तो हाईवे पर जाम की स्थिति ज्यादा विकराल हो गई होती। सुबह के वक्त लोकोशेड पर ज्यादा भीड़ रहती है। कोई आफिस के लिए निकलता है तो स्कूल जाने वालेे बच्चों की भी जबर्दस्त भीड़ होती है। स्कूली बसों की भीड़ भी ट्रैफिक फंसती रहती हैं। सुबह नौ से लेकर ग्यारह बजे तक हाईवे पर जाम ही जाम रहता है।

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