छात्र राजनीति का अखाड़ा बना केजीके

Moradabad Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। केजीके कालेज सोमवार को छात्र राजनीति का अखाड़ा बना रहा। छात्रसंघ अध्यक्ष पद के दो प्रमुख प्रत्याशियों का नामांकन लिंगदोह समिति की सिफारिशों के उल्लंघन के कारण रद्द कर दिया गया। इससे भड़के प्रत्याशियों के समर्थक छात्रों ने परिसर में जमकर हंगामा किया। दोनों के समर्थक आपस में भी भिड़ गए। जमकर नोकझोंक और धक्का- मुक्की हुई। दिनभर परिसर का माहौल गरमाया रहा। बाद में पुलिस ने स्थिति को संभाला।
छात्रसंघ चुनाव के नजरिए से हिंदू कालेज के बाद सबसे अधिक महत्वपूर्ण केजीके कालेज को माना जाता है। यहां अध्यक्ष पद पर समाजवादी पार्टी के समर्थन से चुनाव लड़ रहे दुष्यंत यादव और एबीवीपी के दीपक चौहान के बीच प्रमुख मुकाबला माना जा रहा था। नामांकन के बाद दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ आपत्तियां भी दर्ज कराई थीं। सोमवार को नामांकन रद्द होने की संभावनाओं को देखते हुए सुबह से ही कालेज में गहमागहमी थी। दोनों उम्मीदवारों ने समर्थकों के साथ कालेज में डेरा डाल दिया था। हालात भांपते हुए प्रशासन ने बड़ी संख्या में फोर्स तैनात कर दिया था। दिनभर दोनों की आपत्तियों पर माथापच्ची चलती रही। चुनाव समिति ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों का अध्ययन करने के साथ ही विशेषज्ञों की सलाह ली। देर शाम को दोनों प्रत्याशियों का नामांकन समिति की सिफारिशों के उल्लंघन के आधार पर रद्द कर दिया गया। इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। दोनों पक्ष कालेज के गेट पर ही उलझ गए। दोनों में जमकर नोकझोंक और धक्का- मुक्की हुई। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों को शांत कराया।
इसके बाद प्राचार्य कक्ष में दोनों पक्षों ने जमकर बहस हुई।

नामांकन के बाद आई आपत्तियों पर विशेष तौर से संज्ञान लिया गया था। इसके लिए कानूनी सलाह भी ली गई थी। जिसमें दोनों की प्रत्याशियों को लिंगदोह समिति की सिफारिशों के उल्लंघन का दोषी माना गया। जिसके आधार पर चुनाव समिति ने दोनों के नामांकन रद कर दिए।
डा. जीसी पांडे, मुख्य चुनाव अधिकारी केजीके कालेज

अब कोर्ट की शरण में जाएंगे दोनों प्रत्याशी
नामांकन रद होने के बाद प्राचार्य कक्ष में चुनाव समिति और प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच काफी देर बहस हुई। दोनों ही ओर से तर्क वितर्क चला। चुनाव समिति अपने निर्णय पर अड़ी रही। जिसके बाद दोनों की प्रत्याशियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया।

नामांकन रद होने के बाद भी हुई नारेबाजी
कालेज की चुनाव समिति के अपने निर्णय पर अड़े रहने के बाद प्रत्याशियों के समर्थक खीज उठे। कालेज से बाहर निकलने के बाद कालेज प्रशासन मुर्दाबाद और अपने प्रत्याशी के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। जबकि यह सब लिंगदोह समिति की सिफारिशों का उल्लंघन है और इसी आधार पर इनका नामांकन रद हुआ था।

टल सकते हैं चुनाव
दीपक और दुष्यंत के कोर्ट जाने की स्थिति में चुनाव भी टल सकते हैं। हालांकि जिस आधार पर इनके नामांकन रद हुए हैं उसे दूसरे कालेजों ने अनदेखा कर दिया है। हिंदू और एमएच कालेज के प्रत्याशी खुलकर सपा के नाम का प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन वहां शपथ पत्र लेकर चुनाव लड़ने का मौका दिया गया है। ऐसे में इन्हें कोर्र्ट से स्टे मिल सकता है। निर्णय आने तक चुनाव भी टाले जा सकते हैं।

बदल सकते हैं समीकरण
ऐसे में समीकरण बदलने की भी पूरी संभावना है। दोनाें प्रमुख प्रत्याशियों के बाहर होने के बाद दूसरे छात्र संगठन सक्रिय हो गए। इस स्थिति का सबसे अधिक फायदा अंबेडकर छात्र सभा को मिलेगा। उसने अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। बचे हुए प्रत्याशियों में से किसी को भी अपना उम्मीदवार घोषित कर सकती है।

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