‘जब रसोई एक तो फिर विवाद कैसा?’

Moradabad Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। सन 1971 में आवास विकास की कोठी नंबर 455 में आया चड्ढा परिवार आज भी रिश्तों के एक ही धागे में बंधा है। समय के साथ यह धागा मजबूत हुआ। रिश्तों की मिठास इसी बात से समझी जा सकती है कि दिल्ली में हुई घटना से पहले और आज भी तीनों भाईयों का परिवार एक है। एक रसोई में खाना बनता है। ऊपर पोंटी का परिवार रहता है और नीचे दोनों भाईयों का। मुरादाबाद लौटने के बाद पोंटी के चाचा हरभजन सिंह ने अमर उजाला से यही बात कही।
बड़े गुरुद्वारे में आयोजित कीर्तन और अरदास के बाद आवास विकास अपने घर आए हरभजन अमर उजाला से मिले। हरभजन दिल्ली के महरौली फार्म हाउस में हुई गोलीबारी की घटना के तुरंत बाद ही रवाना हो गए थे। दिल्ली में सात दिन वह पोंटी के कोठी नंबर 24 में ही रहे। अंतिम अरदास में वह परिवार के मुखिया के तौर पर शामिल रहे। उन्होंने बताया कि हमारे परिवार में चूल्हा हमेशा एक ही जला। सन 1971 के बाद मुरादाबाद की कोठी में कई सालों तक हम साथ रहे। आज भी वह डायनिंग टेबल रखी है, जिस पर परिवार के सारे लोग साथ बैठकर खाना खाते थे। रसोई में भी सभी महिलाएं मिलकर खाना बनाती थीं।
उन्होंने चड्ढा कोठी का वह हिस्सा भी दिखाया, जिसके आगे आज भी पोंटी, उनके पिता कुलवंत सिंह, भाई हरदीप और राजेंद्र का नाम लिखा है। उन्होंने बताया कि कुलवंत के बेटे जब भी आते, यहीं ठहरते थे। वहीं दिल्ली में भी तीनों की रसोई एक है। विवाद की जो बात कही जा रही है, उसे परिवार का कोई भी सदस्य नहीं मानता।
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कोठी में है 30 लोगों की डाइनिंग टेबल
हरभजन सिंह चड्ढा ने बताया कि 1971 में आवास विकास की कोठी बनी थी। कोठी में 30 लोगों के एक साथ खाना खाने की डायनिंग टेबल आज भी हमारे प्रेम की गवाही दे रही है। हालांकि कुछ समय बाद सबसे छोटे भाई मुंबई में बस गए। लेकिन बाकी पांचों भाई मिलकर कारोबार को चलाते थे। यह सिलसिला आज भी कायम है। सभी भाईयों के बच्चे और नाती पोते अब इसे बढ़ा रहे हैं।
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