सौरभ जैन के चाचा नरेंद्र का गिरफ्तारी वारंट

Moradabad Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। एनआरएचएम घोटाले में फंसे सौरभ जैन के चाचा और इसी केस में जेल में बंद दवा व्यवसायी विवेक जैन के पिता नरेंद्र जैन के खिलाफ कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। नरेंद्र जैन पर बिना लाइसेंस दवाओं का अवैध रूप से भंडारण करने का आरोप है। छापामारी के दौरान उनके घर से बड़े पैमाने पर दवाआें का भंडार मिला था।
हालांकि तत्कालीन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के प्रभाव के चलते नरेंद्र जैन को अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे में राहत मिल गई थी। कोतवाली पुलिस ने उनका केस एक्सपंज कर दिया था। लेकिन उनके बेटे विवेक जैन को जब सीबीआई ने एनआरएचएम घोटाले में गिरफ्तार किया तो दिल्ली में बैठे ड्रग महकमे के अधिकारियाें के कान खड़े हो गए। दरअसल विवेक जैन की कपिल मेडिकल एजेंसी एनआरएचएम के तहत अस्पतालों और जेल आदि को दवाओं की सप्लाई करती थी। सीबीआई उसे गिरफ्तार कर चार्ज फ्रेम कर चुकी थी। लिहाजा महाऔषधि नियंत्रक को पुराना मामला याद आया। आनन फानन जांच के बाद पुलिस की एक्सपंज रिपोर्ट को गलत बताते हुए महाऔषधि नियंत्रक ने मुरादाबाद ड्रग इंस्पेक्टर को आदेश दिया कि वह नरेंद्र जैन के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज कराएं। जिसके बाद ड्रग इंस्पेक्टर पीके मोदी ने नरेंद्र जैन के खिलाफ 31 जनवरी 2012 को
एडीजे -7 की अदालत में केस दर्ज करा दिया। इस मामले में बार बार सम्मन भेजने के बाद भी जब नरेंद्र न्यायालय में हाजिर नहीं हुए तो 20 अक्टूबर को एडीजे - 7 कौटिल्य गौड़ ने उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया है।



क्या था मामला
महाऔषधि नियंत्रक दिल्ली को सूचना मिली थी कि मुरादाबाद में प्रिंस रोड गांधी नगर स्थित जैन मेडिकल हाल और 36 जैन भवन बाजार गंज सब्जी मंडी स्थित कपिल मेडिकल एजेंसी जिला अस्पताल और जेल में नकली दवाआें की सप्लाई कर रहे हैं। जिसके बाद दिल्ली से पहुंची एक उच्च स्तरीय टीम ने ड्रग इंस्पेक्टर मुरादाबाद को साथ लेकर दोनों प्रतिष्ठानों पर नौ मार्च 2011 को छापामारी की थी। तब कपिल मेडिकल हाल के संचालक विवेक जैन (नरेंद्र के बेटे और अब एनआरएचएम में जेल में बंद) ने तर्क दिया था कि अपने भागीदार मनोज अग्रवाल की मौत के बाद उन्होंने मेडिकल एजेंसी बंद कर दी है और उनका ड्रग लाइसेंस भी छह जनवरी 2011 को एक्सपायर हो चुका है। टीम को छापामारी में गंज बाजार स्थित इसी भवन से बड़े पैमाने पर दवाओं का भंडार पाया था। जिसे जैन मेडिकल के संचालक नरेंद्र जैन ने अपना बताया था। टीम ने नकली होने के शक में इसके नमूने भरे थे और नरेंद्र जैन के खिलाफ कोतवाली में केस दर्ज कराया था। लेकिन तत्कालीन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के दबाव में पुलिस ने 24 घंटे में ही केस एफआर कर दिया था।



क्या है सैंपल जांच की हकीकत
नरेंद्र जैन के घर से मिली दवाओं के जो नमूने ड्रग इंस्पेक्टर की टीम ने लिए थे उसकी जांच रिपोर्ट को लेकर अलग अलग बातें सामने आ रही हैं। हैरत की बात तो ये है कि खुद नरेंद्र मानते हैं कि उनकी दवाआें से लिए नमूनों में आंख के लोशन का नमूना फेल रहा। लेकिन वह उनकी नहीं दवा कंपनी की जिम्मेदारी है। जबकि ड्रग इंस्पेक्टर पीके मोदी का कहना है कि सभी नमूनों का रिजल्ट निगेटिव रहा, यानी सभी दवाएं ठीक थीं।


रजनी ने कुशवाहा से फिर बताया खतरा, मेल
मुरादाबाद। एनआरएचएम घोटाले में फंसे कारोबारी सौरभ जैन की पत्नी रजनी जैन ने सीबीआई डायरेक्टर को मेल भेजकर सुरक्षा की मांग की है। रजनी ने सीबीआई निदेशक से कहा है कि उन्हें और उनके परिवार को पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा से जान का खतरा है। जेल में बंद उनके पति सौरभ जैन को भी बाबू सिंह कुशवाहा नुकसान पहुंचा सकते हैं। लिहाजा सीबीआई उनके पति, परिजनों व उन्हें सुरक्षा मुहैय्या कराए। रजनी जैन ने इससे पहले भी सीबीआई डायरेक्टर को चिट्ठी भेजकर कुशवाहा से अपनी और पति की जान को खतरा बताया था। रजनी का कहना है कि उनके पति को बेवजह फंसाया गया जबकि उनके पति का कभी भी दवाओं का कारोबार नहीं रहा, वह तो ठेकेदारी करते हैं।

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