तीन मौतों से सदमे में पूरा गांव

Moradabad Updated Wed, 24 Oct 2012 12:00 PM IST
पाकबड़ा। ट्रैक्टर ट्राली से कुचलकर पिता-पुत्र समेत तीन लोगों की मौत के बाद कौंढरी गांव में सन्नाटा पसरा रहा। ऐसा लगा मानो पूरा गांव सदमे में है। जैसे ही बाबी का शव गांव पहुंचा, लोग फिर भड़क उठे। दिल्ली हाईवे पर आए और बाबी के शव को रखकर जाम कर दिया। सूचना पर पुलिस के हाथ-पैर फूल गए। आधे घंटे तक हंगामा होता रहा। वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। किसी प्रकार एएसपी ने फिर लोगों को समझा बुझाकर शांत किया।
रतनपुर कलां और गुमसानी मार्ग पर कौंढरी गांव से पहले सोमवार शाम तेज रफ्तार ट्रैक्टर ट्राली ने तीन बाइक सवारों को रौंद दिया था। हादसे में एंजना गांव निवासी किसान सुभाष, उनके बेटे आकाश और साले के बेटे बाबी की मौत हो गई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने सुभाष के शव को सड़क पर रखकर ट्रैक्टर चालक की गिरफ्तारी की मांग की। देर रात तक हंगामा होता रहा। किसी प्रकार पुलिस ने उन्हें शांत किया था।
मंगलवार को पोस्टमार्टम गृह के बाहर ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। पोस्टमार्टम के बाद ग्रामीण सुभाष और आकाश के शव लेकर एेंजना गए तो बाबी का शव कौंढरी लाया गया। इसी दौरान लोगों का आक्रोश फिर भड़क उठा। ग्रामीण बाबी की लाश को लेकर पाकबड़ा थाने के सामने हाईवे पर आ गए और पुलिस पर आरोप लगाकर जाम लगा दिया। लोगों ने जमकर नारेबाजी भी की। जाम के चलते वाहनों की कतारें लग गईं। सूचना पाकर एएसपी केशव कुमार चौधरी पहुंचे और जल्द चालक की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि ट्रैक्टर ट्राली को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। चालक की तलाश की जा रही है।


बाबी के घर में मचा हाहाकार
बेटे बाबी का शव जैसे ही गांव पहुंचा, हाहाकार मच गया। भूप सिंह के घर के बाहर भीड़ लग गई। हर व्यक्ति इस हादसे की ही चर्चा करता रहा। उधर, ऐंजना गांव में भी सुभाष और उसके बेटे आकाश के शव पहुंचने पर लोग उमड़ पड़े। सभी सुभाष की पत्नी और मां-बाप को दिलासा देते रहे। बताते चलें कि सुभाष घर में अकेला था। उसके ऊपर परिवार की जिम्मेदारी थी। अब बूढ़े मां-बाप और बच्चों की परवरिश का बोझ उसकी पत्नी पर आ गया।


बेटे को नहीं देख पाया भूप सिंह
- जेल से बाहर निकालने के दिन भर होती रही कोशिश
अमर उजाला ब्यूरो
पाकबड़ा। जेल में बंद पिता भूप सिंह इस दर्दनाक हादसे के बाद अपने बेटे के शव को भी नहीं देख पाया। हादसे के बाद मंगलवार को ग्रामीण और परिवार के लोग पूरे दिन उसे जेल से पेरोल पर बाहर निकालने की कोशिश करते रहे, लेकिन कामयाब नहीं हुए।
विदित हो कि 15 साल पहले गांव में एक हत्या के मामले में भूप सिंह जेल में बंद है। दो परिवारों के बीच आपसी रंजिश भी है। सोमवार शाम बड़ा बेटा बाबी, भूप सिंह से मिलकर ही घर लौट रहा था कि हादसे में मौत हो गई। भूप सिंह की बेटी अंजू, बेटे शरद, अन्नू और आकाश का रो-रोकर बुरा हाल है। बाबी की मां सुमित्रा भी अपने पति का इंतजार करती रही, लेकिन वह जेल से बाहर नहीं आ सका। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी काफी आक्रोश दिखा। हालांकि जेल के कैदियों और मुलाकातियों ने उसे घटना की जानकारी दे दी थी।
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