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टीएमयू में पैथकॉन सेमिनार में पहुंचे देशभर के दिग्गज चिकित्सक

Moradabad Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। रोग की पहचान और उसके सही इलाज को जांच जितना अहम है उससे कहीं अधिक उसकी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण है। अक्सर देखा गया है कि जो बीमारी नहीं होती उस रोग की रिपोर्ट लैब की ओर से दे दी जाती है। जिसका खामियाजा सबसे अधिक मरीज और फिर चिकित्सक और लैब को भुगतना पड़ता है। ऐसा तभी संभव होता है जब लैब में कार्यरत सबसे निचले स्तर के कर्मचारी जांच को हैंडल करते हैं। कुछ ऐसी खास बातें तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी विश्वविद्यालय में चल रहे दो दिवसीय यूपी पैथकॉन 2012 सेमिनार में उभरकर सामने आईं।
विभिन्न प्रदेशों के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान के चिकित्सकों ने रोगों के स्तर और उसकी जांच पर विस्तार से व्याख्यान दिए। डा. आरके गुप्ता पूर्व डीन एसजीपीजीआई लखनऊ ने कहा कि यूरिन की जांच पेट संबंधी बीमारियों के लिए अहम है। इसे हलके में लेना बीमारी की तह तक नहीं पहुंचने के समान है। लापरवाही से की गई जांच चिकित्सक को पसोपेश और मरीज को खतरे में डाल देता है। हैरत की बात है कि यूरिन की जांच को मामूली जांच समझकर इसकी जिम्मेदारी पैथलैब के सबसे अदने से कर्मचारी को सौंप दी जाती है। नतीजतन रोग होता तो कुछ और है पर इलाज किसी और ही चीज की होती रहती है। एथिक्स के ऊपर व्यवसाय हावी न हो इस बात का सभी को ख्याल रखना होगा।

एमएलएनएमसी इलाहाबाद की डा. वत्सला मिश्रा ने गदूद (प्रोस्टेट ग्लैंड) कैंसर की जांच पर रोशनी डाली। कहा कि इससे संबंधित जांच कैंसर के उपचार के लिए हर मायने में महत्वपूर्ण है। वजह मरीज को कई प्रकार के गदूद के कैंसर हो सकते हैं। थोड़ी सी चूक चिकित्सक को मूल बीमारी तक नहीं पहुंचने देगी। नतीजतन उसका इलाज उस कैंसर का नहीं होगा जिससे वह ग्रसित है। वहीं आईसीपीओ न्यू दिल्ली के डा. सुरेश बंभानी ने बताया कि बच्चेदानी में होने वाले कैंसर और उसके प्रकार तथा जांच पर रोशनी डाली। कहा कि विश्व में सबसे अधिक भारत की महिलाओं में सबसे अधिक बच्चेदानी कैंसर पाया गया है। इसके बाद दूसरे स्थान पर ब्रेस्ट कैंसर हैं। इलाज के लिए बच्चेदानी का कौन सा कैंसर है यह जानना अहम है। पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के डा. असीम दास ने ब्रेस्ट कैंसर और उसकी जांच की प्रक्रियाओं के दौरान बरती जाने वाली सतर्कता पर बल दिया। एआईआईएमएस के डा. एचपी पांती ने खून के कैंसर पर व्याख्यान दिए। कहा कि ब्लड कैंसर की जांच रिपोर्ट ही मरीज को चंगा करने में अहम भूमिका निभाता है। जेएनएमसी डा. वीना माहेश्वरी ने डिंब ग्रंथी सूजन से संबंधित जांच की प्रक्रियाओं पर बल दिया। इससे पूर्व आयकर आयुक्त डा. रमेश कुमार, जिलाधिकारी संजय कुमार, विश्वविद्यालय कुलाधिपति सुरेश जैन ग्रुप वाइस चेयरमैन मनीष जैन ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

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