रायफल क्लब के नाम पर चल रहा बड़ा गोलमाल

Moradabad Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। रायफल क्लब में असलहे की ट्रेनिंग के नाम पर बड़ा गोलमाल चल रहा है। ट्रेनिंग देने के नाम पर वसूली तो फार्म भरने के साथ ही शुरू हो जाती है लेकिन कारतूस एक नहीं फुड़वाया जाता। बारह साल के भीतर केवल एक बार शूटिंग प्रतियोगिता हुई है। जबकि नियम हर साल लाइसेंसधारकों को फायरिंग बट पर ले जाने का है।
जब भी कोई शस्त्र लाइसेंस के लिए फार्म लेने कलेक्ट्रेट जाएगा तो सबसे पहले 100 रुपये की रसीद रायफल क्लब के नाम पर कटेगी। जब लाइसेंस मंजूर हो जाएगा तो एक मोटी रकम इस क्लब के नाम पर ली जाएगी। अधिकारियों का तर्क होता है कि इस फीस से आपको शस्त्र चलाने की प्रैक्टिस देंगे। निशानेबाजी की प्रतियोगिता कराई जाएगी। लाइसेंस नियमावली के मुताबिक तो हर साल लाइसेंस धारकों को फायरिंग बट पर ले जाकर प्रैक्टिस करानी चाहिए। लेकिन मुरादाबाद जिले में बारह साल के भीतर एक प्रतियोगिता 2008 में कराई गई थी। तब से कुछ नहीं हुआ। जबकि वसूली बदस्तूर जारी है। अब तो हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने वाले से भी रायफल क्लब की फीस ली जा रही है।

हैसियत प्रमाण पत्र पर भी रायफल क्लब की फीस
हैसियत प्रमाण पत्र रायफल क्लब की फीस
पांच लाख रुपये तक 250
पांच लाख से दस लाख 500
दस से बीस लाख रुपये 1000
दस लाख से पचास लाख 2500
पचास लाख से ऊपर वाले 5000


लाइसेंस मंजूर होने पर रायफल क्लब के नाम ली जाने वाली फीस
असलाह रुपये
रिवाल्वर 2000
रायफल 1500
बंदूक 1000

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