बैंक लॉकर मिल जाए तो ‘चमत्कार’ मानिए

Moradabad Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। महानगर के बैंकों में अगर लाकर मिल जाए तो चमत्कार ही मानिए। कुछ साल पहले तक लाकर खाली रहा करते थे लेकिन अब हाल यह है कि ढूंढने पर भी नहीं मिल रहे। सारे बैंकों के लाकर फुल हो चुके हैं। बैंकों में जरूरतमंदों के आवेदनों की लंबी फेहरिस्त लंबे समय से पड़ी है। यह हाल सभी बड़े छोटे लाकरों और पब्लिक और निजी बैंकों का है। ऐसे में भी किसी को लाकर मिल जाए तो चमत्कार ही मानिए।
दरअसल बैंकों के पास खाताधारकों की संख्या तो लाखों में है पर इसके बराबर अनुपात में किसी भी बैंक के पास लाकर नहीं है। पब्लिक सेक्टर के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के पास महानगर में वर्तमान में 5000 लाकर उपलब्ध हैं। पर एक भी खाली नहीं और लेने वालों की लंबी लाइन है। किसे दिया जाए ? यह बड़ा सवाल है। इसलिए पहले आएं और पांए का फंडा तो है लेकिन वह भी लागू नहीं हो पा रहा। यही हाल पंजाब नेशनल बैंक और इलाहाबाद बैंक का है। इन बैंकों की सभी शाखाओं को मिलाकर लगभग 8 हजार लाकर शहर में है। इनके पास भी लाकर के आवेदनों का ढेर है। लेकिन उन पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वजह साफ है कि इनके पास आवेदकों की संख्या में लॉकर नहीं है।
अलग-अलग साइज के होते हैं लाकर
सभी बैंक अलग-अलग साइज के लाकर ग्राहकों को उपलब्ध कराते हैं। हालांकि मुख्य रूप से बिग, मिडिल और स्माल लाकर होते हैं। बड़े लाकर की साइज किसी बड़ी बाल्टी के समान होती है। हर लाकर का बैंक की ओर से अलग-अलग किराया निर्धारित है। सबसे अधिक मिडिल और स्माल लाकर की डिमांड होती है।
किराये का प्रारूप-
लाकर का किराया सालाना उसके साइज के अनुरूप बैंक लेता है। जो एक वर्ष में न्यूनतम 800-1000 रुपये के बीच बैठता है। इसके लिए बैंक उपभोक्ता से एफडीआर जमा करा लेता है। मसलन एक उपभोक्ता को कम से कम 15 से 20 हजार रुपये की एफडीआर जमा करनी होगी।

क्या कहते हैं अधिकारी -
क्षेत्रीय प्रबंधक इलाहाबाद- अनुपम त्रिपाठी का कहना है कि लाकर की मांग वर्तमान में बढ़ गई है। यह भी सत्य है कि मांग के अनुरूप किसी भी बैंक के पास लाकर नहीं है। बावजूद इसके बैंक प्रबंधन हर स्तर पर कोशिश कर रहा है।

सहायक महाप्रबंधक जीके मिश्र ने बताया कि लाकर मुहैया कराने के प्रति बैंक प्रतिबद्ध है। यदि किसी ग्राहक को उसके पास के बैंक में लाकर नहीं मिल रहा है तो वह आसपास के संबंधित बैंक की शाखा में लाकर ले सकता है। उन्होंने बताया कि लाकर की जरूरत महसूस होते ही उपभोक्ता को अव्वल लिखित में बैंक से आवेदन करना चाहिए। साथ ही में उसकी प्राप्ति रसीद भी लेना चाहिए। ऐसे में बैंक अपने ग्राहक के प्रति बंध जाता है और लाकर की उपलब्धता होते ही उसे प्राथमिकता के आधार पर मुहैया करा देता है।

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