दवाओं के ‘अटैक’ से बैठ रहा हार्ट

Moradabad Updated Sat, 06 Oct 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। महंगाई आम आदमी को बड़ा दर्द देने लगी है। पहले रोजमर्रा की चीजों ने बजट बिगाड़ा। अब तो दवाईयां भी दर्द देने लगी हैं। लगातार महंगा होता इलाज अब आम आदमी के दायरे से बाहर होने लगा है। सर्जिकल गुड्स हों या फिर सामान्य बुखार में ली जाने वाली गोली सबके दाम दोगुने तक हो गए हैं। जीवनरक्षक दवाओं की हालत ज्यादा ही खराब है। जिंदगी के लिए आवश्यक इन दवाओं की आसमान छूती कीमत लोगों को बेहाल कर रही है।
मेडिकल सुविधा हमेशा से ही घर का बजट बिगाड़ती रही है, लेकिन पिछले छह महीनों की बात करें तो दवाओं के दामों ने आम आदमी के बजट को तहस-नहस कर दिया है। खांसी, जुकाम से लेकर हृदय, ब्लड प्रेशर, ब्रोनकाइटिस आदि बीमारियों में रोजाना ली जाने वाली टैबलेट्स के दाम दो गुना तक बढ़ गए हैं। दवा विक्रेताओं की मानें तो गंभीर बीमारियों में ली जाने वाली जो एक महीने के लिए तीन हजार रुपए की बैठती थीं। वो अब 47 सौ से लेकर पांच हजार तक पहुंच गई हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि हालात कितने ज्यादा खराब हो चुके हैं।
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सरकारी लापरवाही है बड़ी वजह
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। दवाओं के दामों में बेहताशा बढ़ोतरी में सरकारी लापरवाही भी बड़ी वजह है। सरकार ने ड्रग प्राइजिंग कंट्रोल अथारिटी का गठन तो कर रखा है लेकिन उसमें तमाम छेद छोड़ रखे हैं। इसका ही फायदा दवा कंपनियां उठाती हैं। दरअसल, अथारिटी के पास मात्र जीवनरक्षक दवाओं के रेट निर्धारण का अधिकार है लेकिन कंपनियां दवाओं में साल्ट का खेल कर दूसरे नामों से बाजार में उतार देती हैं। इससे ये जीवनरक्षक दवाओं की श्रेणी से बाहर आ जाती हैं। ड्रग एसोसिएशन व मेडिकल रिप्रेजेंटिव्स एसोसिएशन कई बार सभी दवाओं के दामों के निर्धारण का अधिकार इस अथारिटी को देने की मांग कर चुकी हैं लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है।

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बेबी प्रोडक्ट भी हुए महंगे
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। बेबी प्रोडेक्ट भी महंगाई से अछूते नहीं रहे। तकरीबन हर घर में काम आने वाले इन प्रोडक्ट के दाम भी दस से बीस प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। 36 रुपए में बिकने वाला शैंपू बढ़कर 44 रुपए का हो गया है। पाउडर के प्रति डिब्बे के दाम भी दस रुपए तक बढ़ गए हैं। दो डाइपर के पैकेट की कीमत पांच रुपए तक बढ़ी हैं। दवा कारोबारी रमेश सलूजा बताते हैं इसके अलावा घरों में काम आने वाली विक्स, आयोडेक्स जैसी दवाओं की कीमतें भी बढ़ गई हैं।


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दवाओं के यूं बढ़े दाम
अप्रैल 2012 अक्टूबर2012
हृदय रोग
अटोरवा स्टेटिन 50 90
कार्डस (5 गोली) 107 124
स्टोटवास-20 165 185
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टीबी
फोटकास (6 गोली) 28 38
आटीनेक्स 36 50
काम्बुडॉल 37 50
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ब्लेडप्रेशर
एटेन-25 25 35
लोगटनपेटेशिया 30 60
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रोजाना काम आने वाले
कोरेक्स सीरप 63 74
क्वारीडर्म ट्यूब 32 41
सूमो टेबलेट(5) 18 25

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