बहू जिंदा जला दी जाती हैं...बेटी शादी से इंकार कर देती है

Moradabad Updated Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। 38 वें स्थापना दिवस के मौके पर प्रथमा बैंक की ओर से आयोजित मुशायरा ए महफिल में कवियों और शायरों ने उम्दा गजल पेश कर देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। कवियों ने अपनी रचना से दर्शकों को झकझोरने का काम किया तो वहीं शायरों ने बेहतरीन नगमे पेश कर मोहब्बत, प्रेम, तहजीब और इंसानियत के संदेश दिए।
कार्यक्रम का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि मशहूर शायर मंसूर उस्मानी ने दीप प्रज्जवलित कर किया। उन्होंने हौसला गम का यूं बढ़ाया कर आंख भीगे तो मुस्कराया कर, बस गुनाहों को याद रख उम्र भर नेकियां कर भूल जाया कर पेशकर खूब वाहवाही लूटी। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डा. माहेश्वर तिवारी ने रूह में आकर कोई खुद को उतारे मुझ में इक लम्हा ही सही कोई गुजारे मुझ में, कोई दरवाजा दरीचा खुला न सदियों से, दर्द ने चीख ने फिर ढूंढा सहारा मुझ में गीत गाकर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। वहीं योगेंद्र वर्मा व्योम ने न जाने किस भंवर में जिंदगी है, हा हा के मौन है, गायब हंसी है, नहीं परछाइयां तक साथ देती, इसी का नाम शायद बेबसी है पेशकर खूब दाद बटोरे। इसी क्रम में डा. नकवी ने ‘‘बहू जिंदा जला दी जाती हैं, इस बात को सुनकर मेरी मासूम बेटी शादी से इंकार कर देती है’’ उम्दा गजल पढ़कर लोगों को झकझोर दिया। इसके बाद कृष्ण कुमार लाल, आनंद कुमार गौरव, जिया जमीर, आेंकार सिंह ओंकार मनोज मनु, ख्याल मुरादाबादी, शबाब मेनाठेरी ने भी अपनी रचनाएं पढ़ी। इस मौके पर प्रथमा बैंक के सभी अधिकारी मौजूद थे।

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