दारोगा की बेटी झूल गई फांसी पर

Moradabad Updated Wed, 19 Sep 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। हालातों से लड़ने के बजाए एक और युवा लड़की हार गई। पिता की मौत के बाद घर की हालत से परेशान होकर नौकरी ढूंढ रही थी। पिता का फंड क्लीयर नहीं हो रहा था। मृतक आश्रित नौकरी के लिए उसकी कई बार भाई से तकरार भी हुई। सोचा था खुद पैरों पर खड़ी होकर मां का सहारा बनेगी, लेकिन रोजगार नहीं मिला। हताशा भरती गई और मंगलवार शाम शक्तिनगर के किराए के घर में उसने फांसी लगाकर जान दे दी। घटना से मोहल्ले में हड़कंप मच गया।
घटना मंगलवार शाम करीब चार बजे हुई। बरेली के खुर्द नवाबपुरा गांव निवासी दारोगा हरिशंकर शर्मा की दो साल पहले धनौरा मंडी में तैनाती के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। उसके बाद से परिवार पर आफत टूट पड़ी। उनकी पत्नी आदेश को परिवार चलाने के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ती। बेटा देवेश तो गांव जाकर खेती बाड़ी में जुट गया और इधर, बेटी रेशू शर्मा जल्द से जल्द पढ़ाई पूरी कर परिवार का बोझ उठाने की तैयारी करने लगी। हाल में ही उसने चांदपुर डिग्री कालेज से एमए पास किया और मृतक आश्रित नौकरी के लिए अप्लाई करने लगी। कई बैंकों के भी फार्म भरे थे, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
कुछ दिन से उसका भाई के साथ मृतक आश्रित नौकरी को लेकर झगड़ा हो रहा था। मां आदेश ने बताया कि बेटा नौकरी के कागजातों पर साइन नहीं कर रहा था। वह खुद नौकरी करना चाहता था, जबकि बेटी भी उसी नौकरी के लिए जिद कर रही थी। मंगलवार को मां किसी काम से बाजार गई और रेशू ने कमरे की कुं्डी बंद करके अपने दुपट्टे से फांसी लगा ली। उसका शव छत के कुंडे से लटकता हुआ मिला। पुलिस ने दरवाजा खोलकर शव को उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
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फंड के लिए लगा रही थी चक्कर
दारोगा की मौत ने इस परिवार को तोड़कर रख दिया। विभागीय लापरवाही के चलते पिता के फंड का पैसा भी अटक गया। इसके बाद बैंक की ओर से फंड का 20 लाख रुपये किसी और के खाते में चला गया। अब तक यह पैसा नहीं मिल सका। पेंशन इतनी ज्यादा नहीं थी कि बेटी की शादी हो सके। मां बेटी काफी समय से इस पैसे को निकलवाने के लिए चक्कर लगा रही थीं।
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दो माह पहले आई थीं शक्तिनगर
बेटी की पढ़ाई थी, सो दारोगा की मौत के बाद भी मां आदेश ने वापस बरेली जाना ठीक नहीं समझा। शक्तिनगर में रहने वाले सेवानिवृत्त कलक्ट्रेट कर्मचारी कांशीराम पाल के घर में दो माह पहले ही किराए पर कमरा लिया था। किसी से बातचीत नहीं होती थी।
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खुश मिजाज थी रेशू
वह खुश मिजाज थी, पिता की मौत के बाद मां का पूरा ख्याल रखती थी। भाई अपनी शादी के बाद गांव में रह रहा था। इसके चलते वही मां की देखभाल करती थी। मां आदेश ने बताया कि वह कहती थी कि कभी शादी नहीं करूंगी। पिता की नौकरी से जीवन गुजार दूंगी।
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