देशभर के बैंकों में आज से दो दिनों की हड़ताल

Moradabad Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। यूनाईटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर आज से सभी सरकारी बैंक दो दिनों के लिए हड़ताल पर होंगे। स्ट्राइक के दौरान बैंक कर्मी पूरी तरह से बैंकिंग कार्य से विरक्त रहेंगे। इस दो दिवसीय हड़ताल की वजह से लगभग 200 करोड़ रुपये का ट्रांजक्शन काम प्रभावित होगा। इस दौरान न तो कोई निकासी और न ही कोई जमा करने का काम होगा।
पूर्व निर्धारित रणनीति के तहत बुधवार से देशभर के बैंकों में दो दिनों की हड़ताल होगी। इस दौरान देश के सभी बड़े छोटे शहर और कस्बे में बैंक कर्मी विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस हड़ताल से खासकर क्लीयरिंग हाउस प्रभावित होंगे। महानगर में चेक क्लीयरिंग का अधिकारी सिर्फ एसबीआई को ही है। यह प्रत्येक दिन 100 करोड़ रुपये से अधिक का चेक क्लीयर करता है। इसके बाद ही सभी बैंकों में लेन-देन का कार्य संभव होता है। जो हड़ताल के दौरान नहीं होगा। इसका असर निजी बैंकों पर भी पड़ेगा। बैंक विशेषज्ञों की मानें तो इस हड़ताल की वजह से करीब 50 प्रतिशत निजी बैंकों का काम ठप पड़ जाएगा। जिस एटीएम से अधिक संख्या में राशि निकाली जाती हैं उस मशीन में रुपये का संकट आ सकता है।
हड़ताल पर जाने से पूर्व किया प्रदर्शन
मुरादाबाद। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस के बैनर तले महानगर के बैंक कर्मी इंडियन बैंक की स्टेशन रोड शाखा पर विरोध प्रदर्शन कर रोष जताया। प्रदर्शन का कार्यक्रम दोपहर बाद किया गया।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बुधवार की दोपहर बड़ी संख्या में बैंक कर्मी इंडियन बैंक पहुंचे। यहां प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की प्रस्तावित और नई बैंकिंग नीतियों का पुरजोर विरोध किया। जबर्दस्त तरीके से सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए खंडेलवाल कमेटी की सिफारिशों को एकतरफा करार दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार बैंकिंग लॉ एमेंडमेंट बिल संसद में पेश कर रही है। इस बिल में बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट की धारा 12(2) में बदलाव करके मौजूदा दस प्रतिशत की बोटिंग सीमा को बढ़ाकर 26 प्रतिशत करना चाहती है। यह सीमा बढ़ने से देशी और विदेशी पूंजीपति आसारी से देश के प्राइवेट बैंकों पर कब्जा कर लेंगे। इसके अलावा सेक्शन 12(2) के हटाने से किसी भी बैंक के कितने भी शेयर खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे। सरकार आर्थिक सुधारों के नाम पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को निजीकरण तथा मर्जर करना चाहती है। बैंकों का कार्य आउट सोर्सिंग के माध्यम से कराया जा रहा है। इसे पर रोक लगाई जानी चाहिए। साथ ही बैंक कर्र्मियों की लंबित मांग 2010 से चली आ रही है। लेकिन इस पर न तो कोई सुनवाई हुई और न ही सरकार की ओर से कोई वार्ता करना चाहता है। इस मौके पर आयोजित सभा को यूपी बैंक इंपलाइज यूनियन के जिला सचिव एसपी सिंह, यूएफबीईयू के संयोजक राकेश कपूर और एस बी आई के सहायक महासचिव जगदीश सिंह ने संबोधित किया। प्रदर्शनकारियों में एसएस कोहली, अनिमेष शर्मा, प्रताप सिंह, जीपी सिंह, आरके दीक्षित, विपिन जेटली, शीला सूद, परमजीत सिंह, सुधीर सेठ, विपिन विश्नोई, विनीत कुमार, अभय गुप्ता, सर्वेश शर्मा, अनूप शर्मा आदि भी मौजूद रहे।

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