तैंतीस महीनों से मुरादाबाद में ‘फंसी’ फोरलेनिंग

Moradabad Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST

मुरादाबाद। रफ्तार का प्रोजेक्ट मुरादाबाद में फंस गया है। सोलह गांव में 500 किसानों की भूमि ली जानी है लेकिन अभी तक निजाम सौ किसानों को भी नहीं मना पाया। इकतालीस करोड़ का मुआवजा बांटा जाना है और अभी तक बंटा चार करोड़ ही है। किसानों ने मुआवजा रकम बढ़ाने की मांग जोरदार तरीके से उठानी शुरू कर दी है।
मुरादाबाद से बरेली तक के चौड़ीकरण का प्रोजेक्ट 121 किलोमीटर का है। यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2010 में शुरू हुआ था। जून 2013 तक पूरा करना है। एक निजी कंपनी इसका निर्माण करा रही है। मुरादाबाद जिले की सीमा में ही सोलह गांव ऐसे हैं जिनकी जमीन चौड़ीकरण के दायरे में आ रही है। किसानों की संख्या भी पांच सौ के करीब है। प्रशासन ने जमीन के लिए 4 नवंबर 2009 से कसरत शुरू की थी। थ्री ए का नोटिफिकेशन किया गया। इसके बाद आपत्तियां मांगी गईं। इसके बाद थ्री डी का गजट जारी कर दिया गया। लेकिन अभी तक प्रशासन केवल 100 किसानों को ही जमीन के लिए रजामंद कर पाया है। बाकी किसान जमीन नहीं दे पाए हैं। कुल 41 करोड़ का मुआवजा किसानों को बांटा जाना था लेकिन चार करोड़ का ही वितरण आज तक हो सका है। अब तमाम किसान मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलित हैं। अपर आयुक्त प्रशासन की अदालत में वाद दायर कर दिया गया है। मूंढापांडे और दलपतपुर के किसान नोएडा के बराबर जमीन के रेट मांग रहे हैं। इन लोगों ने साफ कह दिया है कि वह इतने रेट पर अपनी जमीन नहीं देंगे।

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