हंगामे की भेंट चढ़ी नगर निगम बोर्ड की पहली मीटिंग

Moradabad Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। नगर निगम बोर्ड की पहली मीटिंग हंगामे की भेंट चढ़ गई। निगम बोर्ड के पदेन सदस्य शहर विधायक यूसुफ अंसारी की मेयर पर की गई टिप्पणी के बाद मीटिंग में हंगामा शुरू हो गया। करीब बीस मिनट तक चले हंगामे को कंट्रोल करने के लिए बोर्ड मीटिंग में पुलिस को घुसना पड़ा। मंच पर पार्षदों के चढ़ने के बाद मेयर ने बोर्ड मीटिंग स्थगित कर दी और पुलिस घेरे के बीच निगम हाल से बाहर चली गईं। हंगामे के चलते मीटिंग के एजेंडे पर बात तक नहीं हो सकी, पुरानी मीटिंग के कार्यों की पुष्टि करने के दौरान ही सपा पार्षद आक्रामक हो गए और फिर हालात बिगड़ते चले गए।
मंगलवार को दोपहर करीब ढाई बजे बोर्ड मीटिंग की शुरुआत पार्षदों के स्वागत से हुई। नगर आयुक्त ने मीटिंग का एजेंडा पढ़कर सुनाया और सदस्याें में एजेंडा वितरित कराया। अपने भाषण में मेयर ने कहा कि मैं उम्मीद करती हूं शहर के विकास में सभी पार्षद दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मेरा सहयोग करेंगे। इसके बाद एजेंडे में दूसरे नंबर पर दर्ज पिछली मीटिंग (11 मई 2011) के कार्यों की पुष्टि पर चर्चा शुरू हुई। पार्षद शीरी गुल ने चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने इंदिरा चौक पर डा. अतर अली गेट बनवाने और इस मार्ग का नाम अपने पति के नाम पर डा. अतर अली मार्ग रखने का प्रस्ताव रखा। हाउस टैक्स में कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्हाेंने धार्मिक स्थलों और उनमें बनी दुकानों से हाउस टैक्स नहीं वसूलने की बात उठाई, जिसे सदन ने मंजूर किया और नगर आयुक्त ने इस बाबत आदेश जारी करने का यकीन दिलाया। इसके बाद पार्षद असद कमाल ने नाला सफाई नहीं होने की बात जोरदार ढंग से उठाई। इसके बाद पार्षद राशिद हुसैन उठे और पार्षद राजेंद्र सिंह को बोलने से बैठा दिया। उन्हाेंने कहा कि मेयर पहले सभी पार्षदों का अफसराें से परिचय कराएं। हंगामे के बीच परिचय शुरू हुआ। तभी विधायक यूसुफ अंसारी पहुंचे। उन्हाेंने मंच पर कोई अतिरिक्त कुर्सी न देख नाराजगी जाहिर की और कहा मेरी कुर्सी कहां है, सपा पार्षद उनके समर्थन में आक्रामक होकर मंच पर बैठी मेयर तक पहुंच गए। सपा पार्षद दल के नेता हाजी रईस भी मंच पर जाकर मेयर और नगर आयुक्त से नोकझोंक करने लगे। आनन फानन मंच पर मेयर की बगल में विधायक के लिए कुर्सी पड़ी। कुछ मिनट पर बाद विधायक भाषण देने डायस पर पहुंचे और मेयर पर टिप्पणी कर दी। जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया मेयर ने सदन स्थगित कर दिया।


क्या कहा था विधायक ने
- शहर विधायक यूसुफ अंसारी ने अपने भाषण में कहा कि मेयर कोई और है और नगर निगम को कोई और ही चला रहा है। उनका इशारा मेयर के पति विनोद अग्रवाल की ओर था। उन्होंने डायस से पांच बार इस बात को दोहराया और नगर आयुक्त को हिदायत दी कि मीटिंगें मेयर के घर पर न हाें बल्कि कैंप आफिस में हों। घर की मीटिंगें मेयर नहीं कोई और (विनोद अग्रवाल) ही लेता है। निगम अफसर जान लें ऐसा गोरखधंधा न हो। मीटिंग में ही कार्यवाही पर दस्तखत हों, मेयर के घर जाकर नहीं। दूसरा आदमी पार्षदाें पर न थोपा जाए। मेयर अपनी जिम्मेदारी समझें और किसी दूसरे की सलाह के बजाए स्वविवेक से काम करें। विधायक ने नगर आयुक्त और निगम अफसराें को हिदायत दी कि सुधर जाएं किसी के इशारों पर काम न करें नहीं तो मैं कड़ा एक्शन लूंगा।


क्या जवाब दिया मेयर ने
- शहर विधायक ने जब माइक संभालते ही मेयर पर हमला बोलना शुरू किया तो वह हक्की बक्की रह गईं। शुरू में तो मेयर और भाजपा पार्षदों ने खामोशी अख्तियार किए रखी। लेकिन विधायक के तेवर तल्ख होते गए। भाजपा पार्षदों के उठने पर मेयर ने उन्हें बैठने को कहा। महापौर ने बेहद तल्ख अंदाज में विधायक से कहा कि आप सदन में ऐसे बातें नहीं कर सकते। आप पदेन सदस्य हैं, आप सदन की कार्यवाही को क्यों बाधित कर रहे हैं। कैंप कार्यालय में निर्माण कार्य होने की बात कहकर मेयर ने घर पर मीटिंग करने की मजबूरी भी बताई। कहा आप एजेंडे पर बात करें और विकास का मार्ग सुझाएं व्यवधान न डालें।


आमने-सामने
मेयर बीना अग्रवाल ने कहा कि विधायक खुद तो कुछ विकास कर नहीं रहे। सत्ता का नाजायज इस्तेमाल कर हमें भी शहर का विकास करने से रोक रहे हैं। डेकोरम को तोड़कर सपा पार्षदाें ने विधायक को जबरन मंच पर बैठाया। जबकि निगम के नियमाें के मुताबिक पदेन सदस्य होने के नाते उन्हें पार्षदाें के साथ नीचे बैठना चाहिए था। फिर भी हमने उनका सम्मान किया। लेकिन विधायक ने गरिमा नहीं निभाई। विधायक के साथ 50-60 बाहरी लोग भी थे जो सदन में नाजायज तरीके से घुसे और माहौल बिगाड़ने लगे। मैं मीटिंग स्थगित नहीं करती तो हालात बेहद खराब हो जाते। मैं चाहे जहां मीटिंग लूं, विधायक को इसमें बोलने का हक नहीं - बीना अग्रवाल, महापौर


हम पदेन सदस्य होने के नाते शहर के विकास की बात करने आए थे, लेकिन महापौर हमारे सवालों का जवाब दिए बिना ही सदन छोड़कर चली गईं। हम जवाब मिलने तक जाने वाले नहीं, यहीं बैठे रहेंगे। हमने गलत कुछ भी नहीं उठाया। मेयर कोई और है और नगर निगम के फैसले कोई और लेता है। निगम अफसरों को निर्देश मेयर नहीं कोई और देता है। हम इसे हरगिज बर्दाश्त नहीं करेेंगे। सदन स्थगित कर मेयर अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकतीं, उन्हें इन सवालों के जवाब देने ही होंगे। - यूसुफ अंसारी, शहर विधायक

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