डीजी दफ्तर के सर्कुलरों पर गंभीर नहीं अफसर

Moradabad Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। आम आदमी की थानों में सुनवाई न होना आम बात है लेकिन पुलिस दफ्तरों में डीजी मुख्यालय के ही सर्कुलर धूल फांक रहे हैं। चार महीने पहले नई सरकार बनने के बाद पुलिस का चेेहरा बदलने की दिशा में कई आदेश जारी हुए लेकिन ये आदेश अभी पुलिस दफ्तरों की फाइलों में ही कैद हैं। जब अपने मुखिया के आदेशों को ही लेकर पुलिस अफसरों का ये रवैय्या है तो समझा जा सकता है आम आदमी से संबंधित मामलों में क्या हाल होगा।
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चार महीने में नहीं बन सके थाने-चौकियों के प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। सात अप्रैल को डीजी दफ्तर से सर्कुलर जारी हुआ था। सभी जिलों से नए थाने-चौकियों से संबंधित प्रस्ताव मांगे गए थे। चार महीने गुजर चुके हैं इस आदेश को आए लेकिन अभी तक ये प्रस्ताव तैयार नहीं हो सके हैं। ऐसा नहीं है कि इन प्रस्तावों को तैयार करने में पुलिस को लंबी-चौड़ी मशक्कत करनी है। इसमें पुराने प्रस्तावों में थोड़ा फेरबदल कर भेजा जाना है। मसलन, यदि मुरादाबाद जिले की बात करें तो यहां गलशहीद, मझोला को कोतवाली का दर्जा देने, सिविल लाइंस में अगवानपुर चौकी को थाना बनाने के प्रस्ताव पुराने हैं। पिछले साल हुए दंगे को देखते हुए मझोला के जयंतीपुर व कटघर के दससराय चौकी क्षेत्र को मिलाकर नया थाना बनाने का प्रस्ताव 2011 में भेजा गया था। अब इन प्रस्तावों को एक साथ संकलित कर भेजा जाना है।
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महीने भर में एक भी पुलिसकर्मी ने दिया संपत्ति का ब्योरा
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। यूपी पुलिस की छवि सुधारने के मकसद से डीजी एसी शर्मा ने बड़ा निर्णय लिया था। उन्होंने प्रत्येक पुलिसकर्मी की संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने के आदेश दिए थे। इन ब्योरे को पुलिसकर्मी के रिकार्ड के साथ अपडेट किए जाने का प्रस्ताव था। सत्रह जुलाई को इसके लिए बाकायदा आदेश जारी किया गया था। इसके अनुपालन में तत्कालीन पुलिस कप्तान सुनील कुमार गुप्ता ने आदेश जारी किया था कि हर पुलिसकर्मी को तीस जुलाई तक हर हाल में अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करना होगा। ऐसा न करने वाले पुलिसकर्मियों का वेतन आहरण न करने के आदेश किए गए थे। कप्तान बदलने के साथ ही प्राथमिकताएं भी बदल गई हैं। एक भी पुलिसकर्मी ने अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया। इसके बाद भी सबका वेतन आहरित कर दिया गया।
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दफ्तरी स्टाफ की क्लासों का नहीं बना शेड्यूल
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। थानों में दर्ज होने वाले मुकदमों के सही धाराओं में दर्ज नहीं होने के मामले आम हैं। गहरे घावों वाली घटनाओं को भी प्रथम सूचना रिपोर्ट (एनसीआर) में दर्ज कर दिया जाता है। लगातार ऐसे मामलों के बाद डीजी मुख्यालय ने दफ्तरी स्टाफ को प्रशिक्षित करने के लिए क्लास बनाए जाने के आदेश दिए थे। इसके लिए हर जिले की पुलिस लाइन में क्लासें आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे। इन क्लासों में दफ्तरी स्टाफ को धाराओं से संबंधित पूरी जानकारियां दी जानी थी। ये शेड्यूल बनाकर मुख्यालय केा भेजा जाना था। इसके हिसाब से ही मुख्यालय से विशेषज्ञों को आना था लेकिन इस आदेश को आए भी डेढ़ महीने से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है। जिले में ये प्रस्ताव तैयार नहीं हो सका है। ऐसा लगता है कि सबकुछ बस ऐसे ही चल रहा है।

‘सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को डीजी मुख्यालय से जारी होने वाले सर्कुलरों पर गंभीरता से कार्रवाई को कहा गया है, क्राइम मीटिंग में इसकी समीक्षा की जाएगी’
- एसपी सिंह, डीआईजी, मुरादाबाद

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