मुरादाबाद में फंसने लगा रफ्तार का प्रोजेक्ट

Moradabad Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। रफ्तार का प्रोजेक्ट फंसता नजर आ रहा है। हाईवे अथारिटी ने 56 किसानों के तय मुआवजे पर उंगली उठाते हुए केस दायर कर दिया है। एनएचएआई ने तर्क दिया कि प्रशासन ने जमीन की श्रेणी में बदलाव करके अवार्ड किया है जो गलत है। मंगलवार को प्रशासन ने इन काश्तकारों को नोटिस जारी करके अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
मुरादाबाद से बरेली तक के चौड़ीकरण का प्रोजेक्ट 121 किलोमीटर का है। यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2010 में शुरू हुआ था। जून 2013 तक पूरा करना है। एक निजी कंपनी इसका निर्माण करा रही है। मुरादाबाद जिले की सीमा में ही बीस से ज्यादा गांव ऐसे हैं जिनकी जमीन चौड़ीकरण के दायरे में आ रही है। मूंढापांडे में ही 100 किसानों की जमीन ली जानी है। जबकि ढाई सौ लोगों के मकान और दुकान इस दायरे में आ रहे हैं। प्रशासन ने मुआवजे की रकम भी तय कर दी है। लेकिन इसका विरोध शुरू हो गया है। हाईवे अथारिटी ने भी प्रशासन द्वारा तय किए गए मुआवजे पर उंगली उठाते हुए अपर आयुक्त प्रशासन के यहां केस दर्ज कर दिया है। कुल छप्पन मुआवजों पर सवाल उठाया गया है। आर्बिट्रेटर जसवंत सिंह ने इन सभी छप्पन लोगों को नोटिस जारी करके अपना पक्ष रखने को कहा है। काश्तकारों से कहा गया है कि वह पूरे रिकार्ड के साथ उपस्थित होकर अपनी बात रखें। ताकि जमीन की श्रेणी को फाइनल किया जा सके।
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