बारिश ने पूर्व वाणिज्यकर कर्मी के परिवार पर बरपाया कहर

Moradabad Updated Sun, 05 Aug 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। मानसून की तेजी ने पुराने मकानों को नेस्तनाबूद करना शुरू कर दिया। शनिवार सुबह कटघर गाड़ीखाना में पूर्व वाणिज्यकर कर्मी स्व. रामपाल सिंह के घर पर बारिश ने कहर बरपाया। दो मंजिले मकान का पिछला हिस्सा भरभराकर ढह गया। परिवार की एक मासूम व महिला मलबे में दब गए। कई को चोटें आईं। चीख पुकार भागमभाग मच गई। देखते ही देखते हजारों की भीड़ जमा हो गई और जिसे जो मिला बचाव कार्य शुरू किया। बाद में पहुंची फायर ब्रिगेड ने स्थानीय लोगों की मदद से चार घंटे तक रेस्क्यू आपरेशन चलाकर महिला को तो बचा लिया, लेकिन मासूम की मौत हो गई। महिला को गंभीर हालत में सांई अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
यह दर्दनाक हादसा शनिवार सुबह करीब सात बजे हुआ। उस वक्त परिवार के कुछ लोग सो रहे थे तो कुछ अपने काम धंधे पर जाने की तैयारी में लगे थे। रामपाल सिंह का मझला बेटा सचिन कमरे में था और उनकी पत्नी सीता किचन में चाय बना रही थीं। बड़े बेटे स्व. अमित की पत्नी नीतू, बेटे वंश को दूध पिलाने आंगन के पास वाले कमरे में गई थीं। जबकि उनकी बेटी सात वर्षीय नंदिनी स्कूल जाने के लिए तैयार हो रही थी। सचिन की मां विमलेश कपड़े धोने में व्यस्त थी और भाई जितेंद्र उर्फ जॉनी नहा रहा था। इसी दौरान अचानक घर के पीछे का हिस्सा भरभराकर गिरने लगा। उसी हिस्से में किचन और नीतू का कमरा था। जो लोग उस हिस्से में थे, तुरंत बाहर की ओर भागे। तबतक पीछे का पूरा हिस्सा बैठ गया। ग्राउंड फ्लोर पर मामी गीता देवी को काफी चोट आई, घिसटते हुए वह किसी तरह बाहर निकल आईं। लेकिन सीता देवी और मासूम नंदनी मलबे में ही दब गए। दोनों के दबे होने की बात पता लगते ही परिवार में चीख पुकार मच गई। मोहल्ले के लोग मकान की ओर दौड़े और दोनों को निकालने की कोशिश शुरू की।
सूचना पाकर कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगे़ड को सूचना दी गई। तब तक सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई। करीब पौने आठ बजे फायर ब्रिगेड ने स्थानीय लोगों की मदद से बचाव कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद 9.38 मिनट पर सचिन की पत्नी सीता को मलबे से निकाला गया। उसके सिर में चोट थी। परिजनों ने तत्काल उसे साईं अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद नंदिनी को बचाने की कोशिश शुरू हुई। लेकिन एक घंटे तक उसका कहीं भी पता नहीं लगा। इसी बीच किसी ने मलबे से बच्चे के कराहने की आवाज सुनी। देखा तो अलमारी के नीचे नंदिनी कराह रही थी। लेकिन जब तक मिट्टी को हटाकर उसे निकाला गया, देर हो चुकी थी। परिजन उसे अस्पताल ले गए, लेकिन डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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जर्जर मकान में रह रहे थे 13 लोग
गुलाबबाड़ी से मकबरा रोड पर गाड़ीथाना स्थित प्रथमा बैंक के सामने सेल्सटैक्स कर्मी रामपाल सिंह का सवा सौ साल पुराना पुश्तैनी दो मंजिला मकान है। करीब पांच साल पहले रामपाल सिंह का देहांत हो चुका है। उनके स्थान पर विभाग में बेटे अमित की नौकरी लगी थी। लेकिन एक्सीडेंट में घायल होने के चलते दो माह पूर्व अमित की भी मौत हो गई थी। परिवार में स्व. रामपाल सिंह की मां मुन्नी देवी, पत्नी विमलेश, बेटे अमित की पत्नी नीतू, बच्चे सात वर्षीय नंदनी व दो साल का वंश, दूसरा बेटा सचिन, बहू सीता व पोती कनक, तीसरा बेटा जितेंद्र उर्फ जॉनी, भाई बलवीर सिंह और मामी गीता देवी, उनका बेटा विक्की और एक भाई की पत्नी शांति देवी रह रहे हैं। कई बार लोगों ने मकान की स्थित को देखकर उन्हें किराए के मकान में जाने की सलाह दी थी, लेकिन वह नहीं माने।

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