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पांच साल से लावारिस सचिन को मिला परिवार

Moradabad Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। करीब पांच साल पहले अमरोहा में स्टेशन पर लावारिस मिले मासूम सचिन को आखिरकार उसका परिवार मिल गया। बच्चे पर दो परिवारों के दावों पर छह माह से चल रही सुनवाई के बाद शुक्रवार को बाल कल्याण समिति ने अपना फैसला सुना दिया। सचिन अब अमरोहा के ही उस व्यक्ति की गोद में खेलेगा, जिसे पांच साल पहले अमरोहा जीआरपी ने सौंपा था। समिति जल्द ही उसे रामपुर शिशु सदन से बुलाएगी।
अक्टूबर 2008 में अमरोहा स्टेशन पर जीआरपी ने लावारिस घूम रहे सचिन को अपनी सुपुर्दगी में लिया था। कुछ दिन बाद जीआरपी ने सचिन को बदावला निवासी 50 वर्षीय प्रीतम सिंह उर्फ पीतांबर की सुपुर्दगी में दे दिया। करीब पौने दो साल तक प्रीतम और उसके परिवार ने सचिन को अपने बेटे की तरह पाला। लेकिन 13 जुलाई 2010 को अचानक मुरादाबाद के प्रकाशनगर निवासी लक्ष्मण सिंह ने सचिन पर अपना हक जताया। लक्ष्मण ने कहा कि सचिन उसका बेटा है जो ढाई वर्ष पूर्व घर से अपहरण कर लिया गया था। इस पर मझोला पुलिस ने अमरोहा जाकर सचिन को लक्ष्मण सिंह की सुपुर्दगी में दिलवा दिया।

घटना के बाद प्रीतम सिंह ने पहले एसपी जेपी नगर और फिर एसएसपी मुरादाबाद से सचिन को वापस दिलाने की मांग की। कोई सुनवाई न होने पर प्रीतम ने हाईकोर्ट की मदद ली और कोर्ट ने बच्चे पर हक के इस मामले को बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया। चार अप्रैल को सचिन को रामपुर शिशु सदन भेज दिया गया। इस दौरान बच्चे पर हक जता रहे लक्ष्मण और उनकी पत्नी का डीएनए टेस्ट भी किया गया। जो बच्चे के डीएनए से मेल नहीं खाया। इसके बाद समिति ने दोनों परिवारों की हैसियत, आय, संपत्ति और बच्चे से भावनात्मक लगाव की जांच पड़ताल शुरू की। गुरुवार शाम समिति ने अमरोहा के प्रीतम सिंह के पक्ष में अपना फैसला सुना दिया।
समिति के अध्यक्ष डॉ. विशेष कुमार गुप्ता ने बताया कि डीएनए टेस्ट में लक्ष्मण का दावा खारिज होने के बाद दोनों परिवारों की हैसियत और स्थिति की पड़ताल की गई। आखिर में यही पाया गया कि बच्चे का भविष्य प्रीतम सिंह के घर में ज्यादा बेहतर रहेगा। सचिन को फोस्टर केयर में दिया जाएगा। इसके लिए प्रीतम के परिवार की मेडिकल रिपोर्ट, अनुबंध पत्र आदि लिया जा रहा है।
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दो और बच्चियों को मिलेगा घर
मुरादाबाद। लुधियाना से भागकर मुरादाबाद पहुंचीं दो मासूम बच्चियों को भी जल्द ही आशियाना मिल जाएगा। सचिन के साथ बाल कल्याण समिति ने शुक्रवार को दोनों बच्चियों हरमीत कौर और अर्चना को भी उनके बताए पते की तलाश करने को कहा है।
विदित हो कि दो दिन पूर्व जीआरपी को स्टेशन पर हरमीत कौर (सात) पुत्री हरमेल सिंह और अर्चना (10) पुत्री रामऔतार प्रसाद निवासी नालंदा लावारिस अवस्था में मिली थीं। शुक्रवार को समिति के सामने प्रस्तुत होने पर दोनों ने अपने पिता पर मारपीट का आरोप लगाते हुए वापस लुधियाना जाने से इंकार कर दिया। साथ ही बिहार के ईसापुर निवासी अपनी नानी के यहां जाने की बात कही। इस पर दोनों बालिकाओं को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया गया। समिति के अध्यक्ष डॉ. गुप्ता ने बताया कि चाइल्ड लाइन ने बच्चियों के द्वारा बताई गई लोकेशन की जानकारी कर ली है। जल्द ही उन्हें ईसापुर भेजा जाएगा।

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