आईएमए की हड़ताल, स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ाईं

Moradabad Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। निरीक्षण और मानकों की जांच के नाम पर प्रशासन की तानाशाही और अभद्र व्यवहार के विरोध में आईएमए के डॉक्टर लामबंद हो गए। सोमवार को एसोसिएशन के सदस्यों ने शहर भर में चिकित्सकीय सेवाएं ठप कर दीं। नर्सिंग होम संचालक सड़कों पर उतर आए और आईएमए भवन से लेकर कमिश्नरी तक पैदल मार्च कर आक्रोश जताया। डॉक्टरों की हड़ताल से शहर भर में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। इलाज के लिए मरीजों और उनके तीमारदारों को सरकारी अस्पतालों में धक्के खाने पड़े।
विनायक नर्सिंग होम में अग्निकांड के बाद निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा मानकों को लेकर प्रशासन की ओर से निरीक्षण अभियान चल रहा है। आईएमए का आरोप है कि प्रशासनिक टीम में शामिल अधिकारी निरीक्षण के दौरान चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टॉफ के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे हैं। कई ऐसे मामलों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है, जो अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आते ही नहीं। यही नहीं, अगर निरीक्षण के दौरान डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर में या कहीं बाहर होते हैं, तो अधिकारी कर्मचारियों को अस्पताल में सील लगाने की धमकी दे रहे हैं। पिछले दिनों श्रेया और शिवम नर्सिंग होम संचालकों के साथ कुछ क्लीनिक संचालकों ने भी घटना की शिकायत आईएमए से की। इसके बाद आईएमए ने एक दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया।
सोमवार को निजी चिकित्सकों ने अपने सभी स्वास्थ्य प्रतिष्ठान बंद करके प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया। आईएमए भवन में डॉक्टरों ने प्रशासन के द्वारा चेक किए जा रहे मानकों पर ही सवाल उठाए। सचिव डॉ. एसके गुप्ता ने कहा कि जब सरकारी अस्पताल ही मानकों को पूरा नहीं कर रहे तो फिर निजी अस्पतालों पर कार्रवाई क्यों। उन्होंने बताया कि एमडीए अस्पतालों के लिए 500 वर्ग मीटर जगह होने का नियम बता रहा है, लेकिन प्राधिकरण ने खुद ही किसी क्षेत्र में 500 वर्ग मीटर के प्लाट नहीं छोड़े। बैठक के बाद डॉक्टरों ने जुलूस निकालकर कमिश्नर ओपीएन सिंह को ज्ञापन सौंपा।
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सरकारी भवनों में आग लगी तो जिम्मेदार कौन?
विनायक हादसे के बाद निजी अस्पतालों में आग से बचाव के इंतजाम तो गए, लेकिन अगर सरकारी भवनों में आग लगी तो उसके लिए जिम्मेदार कौन होगा, प्रशासन पहले यह जवाब दे। डॉक्टरों ने बैठक के दौरान यह सवाल उठाया। डॉ. पल्लव अग्रवाल, डॉ. शलभ ने कहा कि एमडीए निजी अस्पतालों के भवन मानकों को पूरा कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जो सरकारी भवन, बैंक या स्कूल नियमों को ताक पर रखकर खड़े किए गए हैं, उन पर कार्यवाही की बात नहीं हो रही। पूर्व मेयर डॉ. एसटी हसन ने भी प्रशासन की कार्रवाई को गलत ठहराया। इस मौके पर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. नितिन बत्रा, डॉ. विनय गुप्ता, डॉ. अजय अग्रवाल समेत सैकड़ों चिकित्सक मौजूद रहे।
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