थाने से कलेक्ट्रेट तक बदली गुंडे की ‘डेफिनेशन’

Moradabad Updated Tue, 03 Jul 2012 12:00 PM IST

गुंडा एक्ट के लिए पचास के खिलाफ रिपोर्ट भेजती है तो प्रशासनिक अफसर मुश्किल से बीस या पच्चीस बदमाशों को ही जिला बदर करने का आदेश देते हैं। जब समीक्षा होती है तो पुलिस अफसरों का तर्क होता है कि वह जितने बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट भेजते हैं उतनों के खिलाफ होती नहीं है। जबकि प्रशासन का तर्क होता है कि गुंडा एक्ट कार्रवाई के जो मानक हैं वह पूरे ही नहीं हो पाते हैं।

शासन की समीक्षा में भी गूंजा ‘गुंडा एक्ट’
मुरादाबाद। गुंडा एक्ट की कार्रवाई शासन तक भी पहुंच चुकी है। लखनऊ में हुई समीक्षा में भी यह मुद्दा गूंजा था। उस समय प्रदेश के कई जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तान ने अपने अपने तर्क रखे थे। पुलिस कप्तान का कहना था कि एडीएम के पास जो रिपोर्ट जाती है उस पर पूरी तरह से कार्रवाई ही नहीं होती। जबकि प्रशासन ने तर्क रखा था कि पुलिस की रिपोर्ट मानकों के आधार पर नहीं आती है।

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