बिजली संकट से निजात को रेलवे के अनूठेइंतजाम

Moradabad Updated Fri, 29 Jun 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। बिजली संकट के आगे हथियार डालने के बजाए रेलवे ने जो इंतजाम शुरू किए हैं उससे सीखने की जरूरत है। पहले प्लेटफार्म पर ट्रेन आने के साथ बिजली जलने और ट्रेन जाने के साथ ही बुझने की व्यवस्था की गई अब बिजली का विकल्प ढूंढा गया है। रेल मंडल में पांच सोलर सब स्टेशन बनने जा रहे हैं। यहां बनने वाली सोलर लाइट से रेलवे की बिल्डिंगों को जगमग किया जाएगा। यानी बिजली के मामले में जल्द ही रेलवे आत्मनिर्भर होने जा रहा है।
रेलवे बोर्ड सौर ऊर्जा के अधिकतम प्रयोग पर जोर दे रहा है। जिसके तहत सोलर पावर सब स्टेशन बनाए जाने की तैयारी की जा रही है। पूरे देश में सौ से अधिक स्थानों पर इन्हें स्थापित किया जाएगा। मुरादाबाद मंडल में पहले चरण में पांच स्थानों का चयन किया गया है। जिसमें डीआरएम कार्यालय, रेलवे अस्पताल और जड़ीपानी ट्रेनिंग स्कूल मसूरी को शामिल किया गया है। यहां दस किलोवाट क्षमता के सबस्टेशन लगाए जाएंगे। प्रवर मंडल विद्युत अभियंता मनोज कुमार सेमवाल ने बताया कि ये सिस्टम हाइड्रिल पावर के साथ काम करेगा। बिजली जाने पर जेनरेटर चलाने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि लोड के अनुसार अभी यह क्षमता बहुत कम है। धीरे धीरे करके इसकी क्षमता बढ़ाई जाएगी। यह प्रोजेक्ट अभी प्रारंभिक चरण में हैं। पुणे की कंपनी से इसके लिए करार हुआ है। जिसके पैनल की आरडीएसओ (रेलवे डेवलेपमेंट एंड स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन) दिल्ली में टेस्टिंग चल रही है। हालांकि मुख्यालय से टेंडर जारी कर दिए गए हैं। जल्द ही इसका कार्य शुरू कर दिया जाएगा। एक सब स्टेशन पर 15 से 17 लाख रुपये का खर्च आएगा। अभी इसके साथ बैटरी अटैच नहीं की जा रही हैं। दूसरे चरण में बैटरी लगाई जाएंगी। इससे सालाना लगभग दस से 12 लाख रुपये की बिजली बचाई जा सकेगी।

सोलर पावर सब स्टेशन
आरडीएसओ (रेलवे डेवलेपमेंट एंड स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन) दिल्ली में सब सोलर प्लेटों का चल रही टेस्टिंग।
मुख्यालय से जारी किए गए टेंडर
खर्च - 15 से 17 लाख रुपये
लाइफ - 20 साल

डीआरएम कार्यालय 10 किलो वाट
रेलवे अस्पताल 10 किलो वाट
जड़ीपानी स्कूल मसूरी 10×3 किलोवाट

रनिंग रूम में लगेंगे सोलर गीजर
सीनियर डीईई ने बताया कि इसी साल बिजली बचाने के लिए रनिंग रूम में सोलर गीजर लगाने की योजना है। मंडल में 12 स्टेशनों पर रनिंग रूम हैं। जिसमें पांच का चयन कर लिया गया है। जिसमें मुरादाबाद, बरेली, रोजा, देहरादून और हापुड़ शामिल हैं। यहां ठहरने वाले रेलवे के रनिंग स्टाफ को ठंड में सौर ऊर्जा से गरम किया गया पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

पहले ही मिल चुका है फाइव स्टार का दर्जा
मुरादाबाद डीआरएम कार्यालय उत्तर रेलवे में बिजली बचत के लिए फाइव स्टार रेटिंग का दर्जा पाने वाला पहला कार्यालय है। इसके साथ ही स्टेशन पर सत्तर तीस का प्रयोग शुरू कर दिया गया है। जिसमें गाड़ियों प्लेटफार्म पर आने के साथ सभी लाइटें जलने लगती है। ट्रेन नहीं होने पर 70 प्रतिशत लाइटें स्वत: ही बंद हो जाती हैं। अब सोलर सबस्टेशन लगने के बाद बिजली की बचत में और भी मानक स्थापित होंगे।

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