निकाय चुनाव के रैंप पर फिसली खादी

Moradabad Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
मुरादाबाद। देशप्रेम और आजादी के नग्मे खूब गूंजे, लेकिन आजादी के दौर की खादी को नेता भुला बैठे। निकाय चुनाव के रैंप पर इस बार खादी को किसी का प्यार नहीं मिला। जींस-टीशर्ट और ब्रांडेड पैंट शर्ट में स्टाइलिश नेता दिखे, जिन्होंने खादी का कुर्ता पायजामा तो दूर, गांधी टोपी तक नहीं पहनी। खादी ग्रामोद्योग की मानें तो विधानसभा चुनाव की अपेक्षा निकाय चुनाव में खादी की बिक्री का ग्राफ 50 फीसदी आंकड़ा भी न छू सका।
एक दौर था, जब नेतागिरी की पहचान गांधी की खादी से ही होती थी। नेता सिर से लेकर पांव तक खादी के कपड़े पहनते थे। जनता पर खूब इंप्रेशन पड़ता था और लोग नेताजी को गांधीवादी मानकर पलकों पर बिठाते थे। लेकिन इस बार निकाय चुनाव में नेताओं ने खादी को बिल्कुल तवज्जो नहीं दी। इसके चलते शहर के चार खादी ग्रामोद्योग केंद्रों पर खादी वस्त्रों की बिक्री काफी कम हुई। जबकि तीन माह पूर्व विधानसभा चुनाव में नेताओं की पहली पसंद खादी थी। सिविल लाइन केंद्र से मार्च 2012 में करीब 2.67 लाख रुपये के खादी के कपड़े बिके। वहीं जून में यह बिक्री महज 1.40 लाख रही। यही हाल बाजारगंज, कुंवर टाकीज, कचहरी रोड स्थित खादी ग्रामोद्योग केंद्रों का रहा।
सिविल लाइन केंद्र के व्यवस्थापक योगेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार विधानसभा चुनाव में संभवत: राजनैतिक दलों ने भी अपने कार्यकर्ताओं को खादी पहनने के निर्देश जारी किए थे। इसके चलते खादी के कपड़ों की बिक्री धड़ल्ले से हुई। लेकिन निकाय चुनाव में पार्टियों के बड़े नेताओं का रुझान भी नहीं दिखा। गली मुहल्लों के नेताओं ने अपनी सुविधा और पसंद के मुताबिक कपड़े पहने।

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