नया मुरादाबाद पर खाली हो रहा सरकारी खजाना

Moradabad Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
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मुरादाबाद। एमडीए की सपनों की कालोनी नया मुरादाबाद...करीब 12 साल पहले एक हजार एकड़ पर बड़ी कालोनी बसाने का ख्वाब देखा गया था। सात साल पहले सपना हकीकत में बदला... एमडीए ने सारे प्लाट बेचकर अपनी पीठ थपथपाई। एमडीए का मानना है कि जितना कालोनी के लिए सोचा गया था वह पूरा कर लिया गया। बात सही भी है एमडीए के व्यावसायिक हित तो सध गए लेकिन हकीकत में यह कालोनी कभी भी अपने रूप में नहीं आ सकी। लोग बसे नहीं और इंफ्रास्ट्रक्चर संभालने में एमडीए हर माह करीब 25 लाख रुपये फूंक रहा है। जाहिर है कि एक हाथ से एमडीए ने जो कमाया था वह दूसरे हाथ से इस कालोनी पर खर्च कर रहा है। यह भी तय नहीं कि खर्च का यह सिलसिला थमेगा कब।
वर्ष 2003 में एमडीए की ओर से करोड़ाें रुपये खर्च कर नया मुरादाबाद आवासीय योजना को लगभग 900 एकड़ क्षेत्र में जोरशोर के साथ अमली जामा पहनाया गया था। इसके तहत छोटे-बड़े आवासीय और व्यवसायिक दोनों प्रकार की प्लाटिंग की गई थी। शुरू के दौर में एमडीए की ओर से 2100 रुपये प्रति स्कवायर मीटर भूमि की कीमत रखी गई। शहर और बाहरी प्रदेश के लोगों ने यहां जमीनें खूब खरीदीं। पर किसी ने यहां अब तक भवन नहीं बनवाया। जमीनें तो एमडीए की सभी बिक गईं। पर बसने को अब तक कोई राजी नहीं हुआ है। पूरा नया मुरादाबाद उजाड़ का दंश झेल रहा है। एमडीए की ओर से बनाए गए बिजली घर, पार्क और नालियां, सड़क सभी बदहाल स्थिति में पहुंच चुकी है। बिजली के खंभे भी जर्जर हो चुके हैं। सुरक्षा कर्मी भी तैनात किए गए हैं। जबकि इसके रख रखाव में विभाग की ओर से महीने में एक आकलन के मुताबिक लगभग 25 लाख रुपये खर्च कर किए जा रहे हैं। इससे न तो एमडीए को और न ही योजना के तहत भूमि खरीदने वालों को कोई लाभ मिल रहा है। यह क्रम बीते 2005 से चल रहा है। एमडीए ने पहले योजना को अमलीजामा पहनाने में करोड़ों खर्च किये और अब इसे बचाने के लिए लाखों रुपये फूंक रहा है। उधर योजना की देख रेख कर रहे अधिशासी अभियंता पीपी सिंह का कहना है कि एमडीए अपनी ओर से एक पैसा खर्च नहीं कर रहा है। देखरेख की मद में होने वाले खर्च की रकम भूमि की कीमत में (मेंटेनेंस कास्ट) के नाम से जुड़ी होती है। मेंटेनेंस मद से धन खत्म होने के बाद योजना के धारकों से मेंटेनेंस टैक्स लगा दिया जाता है।
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